कांगड़ा। देवभूमि हिमाचल की वादियों में उस समय शोक की एक गहरी लकीर खिंच गई, जब एक जवान बेटे की अंतिम विदाई पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा, हर चेहरा गमगीन था और हर आंख नम।
20 वर्षीय फौजी की हादसे में मौत
देश सेवा का सपना देखने वाला एक होनहार युवक यूं अचानक अपनों से बिछड़ जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। उपमंडल जवाली के बेही पठियार पंचायत के 20 वर्षीय अग्निवीर जवान अमनीत की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
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छुट्टी काट ड्यूटी पर लौट रहा था जवान
बताया जा रहा है कि छुट्टी खत्म होने के बाद वह अपनी यूनिट ज्वाइन करने के लिए रवाना हुए थे। जौंटा के समीप उनकी बाइक अचानक हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय देते हुए उन्हें नूरपुर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
हैदराबाद में थी तैनाती
अमनीत डोगरा रेजिमेंट में तैनात थे और वर्तमान में हैदराबाद में सेवाएं दे रहे थे। कम उम्र में ही उन्होंने सेना की वर्दी पहनकर देश की रक्षा का संकल्प लिया था। परिवार और गांव को उन पर गर्व था।
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माता-पिता ने खोया इकलौता बेटा
वह माता-पिता के इकलौते बेटे थे, जबकि उनकी दो बहनें हैं। बेटे की असामयिक मौत की खबर मिलते ही घर में मातम छा गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था और बहनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
परिवार में मची चीख-पुकार
जब सेना के जवान अमनीत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर उनके पैतृक गांव लेकर पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो उठा। पूरे गांव ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सैन्य परंपराओं के अनुसार उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच अंतिम संस्कार किया गया और उनके चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी।
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अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैंकड़ों लोग
अंतिम यात्रा में 8 JAKLI, 100 फील्ड रेजिमेंट और CMP के जवानों सहित कई सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार वीर सिंह और ASI बलविंदर सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व सैनिक कैप्टन चुन्नी लाल, कैप्टन प्रताप सिंह, कैप्टन अश्वनी कुमार, सूबेदार मेजर चूहड़ राम तथा एक्स सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष एवं डिप्टी डायरेक्टर जितेंद्र पाल सहित सैकड़ों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
पूरे इलाके में शोक
गांव के लोगों ने बताया कि अमनीत स्वभाव से बेहद मिलनसार और अनुशासित युवक थे। सेना में भर्ती होकर उन्होंने अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया था। उनकी असमय मृत्यु ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।
