शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब किसी भी तरह के संगठित अपराध, चाहे वह नशा तस्करी ही क्यों न हो, उम्रकैद या मौत की सजा के काबिल मानी जाएगी। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध विधेयक विधानसभा में मंजूर हो गया।
इन अपराधों के लिए मिलेगी फांसी/उम्रकैद
- नशा तस्करी
- अवैध खनन
- जंगलों की कटाई
- जंगली जानवरों की तस्करी
- खतरनाक पदार्थों की डंपिंग
- मानव अंगों की तस्करी
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- अस्पतालों में इलाज के फर्जी बिल लगाकर सरकार को चूना लगाने, यानी झूठे क्लेम करने
- साइबर आतंकवाद फैलाने
- फिरौती मांगने और फर्जी दस्तावेज बनाने का रैकेट चलाने
- खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने
- मैच फिक्सिंग जैसे संगठित अपराध करने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रावधान कर दिया गया है।
राज्यपाल को भेजा जाएगा
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को सदन में यह विधेयक पेश किया था, जिसे सदन से मंजूरी मिल गई। अब यह विधेयक मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा जाएगा। नशा बरामद हुआ तो 14 साल की लगेगी,
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अगर हिमाचल प्रदेश में किसी व्यक्ति के पास से नशा बरामद होता है, या वह किसी से नशा खरीदता हुआ पाया जाता है, या फिर वह नशे की सप्लाई करने वाला मिलता है तो उसे न्यूनतम 2 साल और अधिकतम 14 साल की जेल होगी। उस पर 20 हजार रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सरकारी कर्मचारी को ज्यादा सजा
अगर कोई सरकारी कर्मचारी नशा करता, खरीदता या नश के व्यापार में लिप्त पाया जाता है तो उसे तय सजा का डेढ़ गुना सजा होगी और उतना ही जुर्माना भी देना पड़ेगा। नशा तस्कर की संपत्ति जब्त होगी।
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नए बिल के पारित होने के बाद अब हिमाचल सरकार नशा तस्करी में लिप्त लोगों की संपत्ति भी जब्त कर सकेगी। इसी के साथ अगर कोई व्यक्ति संगठित अपराध के लिए किसी भीड़ को उकसाता है, आपराधिक षड्यंत्र करता है तो उसे कम से कम एक साल की जेल होगी, साथ ही 5 लाख तक जुर्माना भी देना होगा।
