चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित पवित्र मणिमहेश यात्रा इस बार कुछ नए नियमों के साथ शुरू होने जा रही है। इस साल ये यात्रा 16 अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगी। भरमौर उपमंडल के हड़सर गांव से शुरू होने वाली इस कठिन और पावन यात्रा की तैयारियों में प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।
हेलीकॉप्टर में आना-जाना हुआ सस्ता
हर साल लाखों श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा पर निकलते हैं, जो धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम मानी जाती है। श्रद्धालुओं को इस बार हेली टैक्सी सेवा के किराये में राहत दी गई है।
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जानें कितना देना होगा किराया
भरमौर से गोरीकुंड तक आने-जाने का किराया अब ₹7000 तय किया गया है, जो पिछले वर्ष करीब ₹8000 था। यह सेवा 9 अगस्स से 31 अगस्त तक उपलब्ध रहेगी। चंबा के उपायुक्त मुकेश रेपसवाल के अनुसार, हेली सेवा का टेंडर पूरा हो चुका है और ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी गई है। श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि बुकिंग केवल अधिकृत पोर्टल से ही करें ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
कहां-कहां लगेंगे लंगर?
NGT द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस बार डल झील के आसपास कोई लंगर नहीं लगेगा। झील से दूर व विपरीत जलप्रवाह क्षेत्र में ही लंगर लगेंगे। इसके अलावा भरमौर में ददबां और पट्टी के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर के मार्ग पर कोई भी लंगर नहीं लगाया जाएगा।
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14 KM की कठिन पैदल चढ़ाई
जो श्रद्धालु पैदल यात्रा का विकल्प चुनते हैं, उन्हें हड़सर से मणिमहेश झील तक करीब 14 किलोमीटर लंबी और ऊबड़-खाबड़ चढ़ाई तय करनी होती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और मौसम की बेरुखी, दोनों ही इस यात्रा को और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इस मार्ग में भोजन, टेंट, चिकित्सा और सुरक्षा की उचित व्यवस्था की जा रही है।
6-7 लाख श्रद्धालुओं की होती है भागीदारी
विदित रहे कि, हर साल 6 से 7 लाख श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा करने आते हैं। शिवभक्तों के लिए समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील में स्नान करना मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।
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एंट्री शुल्क देना होगा
इस यात्रा में शामिल होने वाले हर श्रद्धालु को इस बार एंट्री कम सेनिटेशन शुल्क देना होगा। यह पहला मौका है जब मणिमहेश यात्रा पर ऐसा शुल्क लगाया गया है। इस बार की यात्रा में प्रशासन द्वारा यात्रियों से 100 रुपए का एंट्री कम सेनिटेशन शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क आपसे एंट्री गेट पर ही लिया जाएगा। जिसे देने के बाद ही श्रद्धालु अपनी यात्रा को शुरू कर पाएंगे।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए लिया गया फैसला
प्रशासन का दावा है कि यह राशि श्रद्धालुओं के मार्ग में साफ-सफाई और पर्यावरणीय संरक्षण पर खर्च की जाएगी। इस निर्णय को ईको डेवलपमेंट कमेटी मणिमहेश की बैठक में मंजूरी दी गई है, जिसमें व्यापारियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी रही।
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दुकानदारों और ढाबा संचालकों पर भी नई सख्ती
- यात्रा मार्ग पर दुकान या ढाबा लगाने वालों को भरमौर के आरओ कार्यालय में पंजीकरण करवाना जरूरी कर दिया गया है।
- छोटी दुकान या ढाबा वालों को 500 रुपए
- बड़ी दुकान या ढाबा वालों को 3000 रुपए शुल्क देना होगा।
- जो दुकानदार या ढाबा संचालक अपने आसपास गंदगी फैलाता पाया गया, उस पर 5 हजार तक जुर्माना लगाया जाएगा।
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सुविधा कितनी, शुल्क कितना?
श्रद्धालु और स्थानीय व्यापारी इस नए नियम को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दे रहे हैं-
- क्या प्रशासन इस राशि का सही उपयोग सुनिश्चित कर पाएगा?
- क्या श्रद्धा के रास्ते में स्वच्छता जरूरी है या शुल्क?
- क्या प्रशासन इस शुल्क के बदले श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं दे पाएगा?
