शिमला। हिमाचल प्रदेश में साल 2020 में हुए पंचायत चुनावों में 1808 महिलाओं ने ग्राम पंचायतों का नेतृत्व किया था। अब ये संख्या घटकर 1789 होने वाली है। इसकी वजह है कि हाल ही में सरकार ने 44 पंचायतों को नगर पंचायत बना दिया है। हालांकि योल कैंट से कटकर चार नई ग्राम पंचायतें भी बनी हैं।
कम हुई पंचायतें, घटा नेतृत्व
गौरतलब है कि जयराम सरकार के कार्यकाल में पंचायतों की संख्या 3615 थी। अब ये संख्या घटकर 3577 हो गई है। पंचायतों की संख्या कम होने से 19 ग्राम पंचायतों में महिलाओं का स्थान कम होगा।
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महिला के खाते में जुड़ेंगी सीट
महिला आरक्षण तय करने के लिए ग्राम पंचायतों की आधी यानी 50 प्रतिशत सीटों पर ब्लॉक को इकाई माना गया है। वहीं अगर किसी ब्लॉक में ग्राम पंचायतों की संख्या विषम यानी ऑड हो जाती है तो प्वाइंट पांच का फॉर्मूला लगने से एक और सीट महिला के खाते में जुड़ेंगी।
महिलाओं के लिए 50% आरक्षण
सीट अगर ओपन हो जाती है को महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं। इसमें भी महिलाओं को अधिकार दिए गए हैं। वहीं पंचायती राज चुनावों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू है। इससे महिलाओं के हिस्से में कुल सीटों की आधी संख्या आएगी।
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बढ़ रही है महिलाओं की भागीदारी
ग्रामीण स्तर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इसे के चलते महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें रख गई हैं। पंचायती राज विभाग के अनुसार अगर विषम संख्या की स्थिति आती है तो पुरुषों को नहीं बल्कि महिलाओं को एक और सीट मिलेगी।
महिलाओं को एक सीट ज्यादा !
पंचायत प्रधान पद का आरक्षण ब्लॉक स्तर पर मान्य होता है। फिलहाल पूरे प्रदेश में 91 ब्लॉक्स हैं। इन खंडों में जितनी पंचायतों में विषम संख्या आएगी, वहां आरक्षण के नियमों के मुताबिक महिलाओं को एक सीट ज्यादा मिलेगी।
दिसंबर में हो सकते हैं चुनाव
दिसंबर के महीने में हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरी होगा। कयास हैं कि दिसंबर में ही चुनाव भी हों। निर्वाचन आयोग और विभाग ने चुनावों को लेकर तैयारियां शुरू भी कर दी हैं।
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शुरु हो गई है चुनावों की तैयारी
सभी उपायुक्तों को रोस्टर तैयार करने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में 3577 पंचायतों में प्रधान, उप प्रधान, 91 पंचायत समितियों और 249 जिला परिषद वार्डों में सदस्यों के लिए चुनाव होना है। बता दें कि सिर्फ उप प्रधान का पद आरक्षित नहीं है।
