शिमला। पहले नवरात्र के साथ ही पूरे प्रदेश में त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। बाजारों में दीयों की रौशनी और मिठाइयों की खुशबू से रौनक लौट आई है, लेकिन इस बीच आम उपभोक्ता के लिए एक बुरी खबर है।
सरसों तेल और दालें महंगी
हिमाचल प्रदेश में सरकारी डिपुओं के जरिए मिलने वाला सरसों का तेल और दालें महंगी हो गई हैं। ऐसे में त्योहारों के बीच जहां घरों में पकवानों की खुशबू फैलेगी, वहीं रसोई का बजट संभालना लोगों के लिए चुनौती बन जाएगा।
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अब महंगी मिलेगी हर दाल
राज्य के थोक बाजारों में दाम बढ़ने के बाद अब डिपुओं में मिलने वाली सभी दालों की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है।
- NFSA उपभोक्ता (सस्ते राशन श्रेणी)
- मलका दाल – अब 66 रुपये/किलो, पहले 56 रुपये।
- चना दाल – अब 72 रुपये/किलो, पहले 66 रुपये।
- उड़द दाल – अब 76 रुपये/किलो, पहले 58 रुपये।
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- APL परिवार (सामान्य उपभोक्ता)
- मलका दाल – अब 71 रुपये/किलो, पहले 66 रुपये।
- चना दाल – अब 77 रुपये/किलो, पहले 66 रुपये।
- उड़द दाल – अब 81 रुपये/किलो, पहले 68 रुपये।
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- टैक्स पेयर उपभोक्ता
- मलका दाल – 91 रुपये/किलो (पहले भी यही कीमत)।
- चना दाल – अब 97 रुपये/किलो, पहले 70 रुपये।
- उड़द दाल – अब 101 रुपये/किलो, पहले 92 रुपये।
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सरसों तेल भी हुआ महंगा
कई महीनों बाद उपभोक्ताओं को डिपुओं में सरसों तेल उपलब्ध होगा, लेकिन इसकी कीमत ने भी राहत के बजाय बोझ बढ़ा दिया है।
- NFSA और APL परिवारों के लिए – अब 160 रुपये/लीटर, पहले 146 रुपये।
- टैक्स पेयर उपभोक्ताओं के लिए – अब 168 रुपये/लीटर, पहले 153 रुपये।
कितनी हुई सप्लाई?
हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने त्योहारी सीजन को देखते हुए दालों और तेल की आपूर्ति के बड़े ऑर्डर जारी किए हैं। कुल 1,09,522 क्विंटल दालें डिपुओं के लिए मंगाई गई हैं। अब तक निगम के गोदामों में 48,544 क्विंटल दालें पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा, 1 करोड़ 21 हजार 114 लीटर सरसों तेल का सप्लाई ऑर्डर दिया गया है। इसमें से 13 लाख 40 हजार लीटर तेल गोदामों में पहुंच चुका है। जिसमें-
- मलका दाल : 36,976 क्विंटल
- चना दाल : 35,674 क्विंटल
- उड़द दाल : 36,872 क्विंटल
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उपभोक्ताओं की जेब पर असर
त्योहारों में वैसे ही खर्च बढ़ जाते हैं, ऐसे में डिपुओं से मिलने वाले राशन का महंगा होना आम उपभोक्ता के लिए बड़ी चिंता है। परिवारों का कहना है कि त्योहार के दिनों में जब पकवान और मिठाइयों की डिमांड सबसे ज्यादा होती है, तभी दाल और तेल महंगे हो जाने से रसोई का संतुलन बिगड़ गया है।
