शिमला। हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ी खबर है। सुक्खू सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है- जिसका सीधा असर युवाओं की जेब पर पड़ेगा। दरअसल, सुक्खू सरकार ने सरकारी सर्टिफिकेट बनवाने की फीस तीन गुना ज्यादा बढ़ा दी है।
सर्टिफिकेट की फीस बढ़ी
अधिसूचना के तहत विभिन्न प्रकार के सरकारी प्रमाणपत्रों और सेवाओं की फीस को पुनः निर्धारित किया गया है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ने वाला है, जो पुलिस वेरिफिकेशन या चरित्र प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों के लिए आवेदन करते हैं। अब इन सेवाओं के लिए पहले की तुलना में तीन गुना अधिक शुल्क चुकाना होगा।
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पहले 50 रुपए थी फीस
विदित रहे कि, पहले जहां चरित्र प्रमाणपत्र और पुलिस वेरिफिकेशन के लिए केवल 50 रुपए बतौर पुलिस शुल्क लिया जाता था, अब इस राशि को बढ़ाकर 150 रुपए कर दिया गया है।हालांकि, यह केवल पुलिस विभाग की ओर से लिए जाने वाली राशि है।
चुकाने होंगे 200 रुपए
इसके अलावा जब इसमें लोकमित्र केंद्र का सेवा शुल्क, कलर प्रिंटिंग का खर्च और सरकारी प्रसंस्करण शुल्क जोड़े जाते हैं, तो यह लागत लगभग 200 रुपए तक पहुंच जाती है। यह बदलाव प्रदेश में लागू होते ही प्रभावी हो गया है। अधिसूचना जारी होते ही लोकमित्र केंद्रों ने इस नए शुल्क ढांचे के अनुसार सेवाएं देना आरंभ कर दिया है।
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युवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
इस वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ेगा, जो विभिन्न सरकारी नौकरियों, अनुबंध आधार पर भर्ती, निजी संस्थानों या शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अक्सर चरित्र प्रमाणपत्र और पुलिस वेरिफिकेशन की आवश्यकता महसूस करते हैं। पहले जहां ये प्रमाणपत्र कम लागत में बन जाया करते थे, वहीं अब एक सामान्य दस्तावेज के लिए दो सौ रुपए तक का खर्च आना आम बात हो जाएगी।
क्यों लिया ऐसा फैसला?
सरकार का कहना है कि यह निर्णय ऑनलाइन सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूत करने की दिशा में लिया गया है, लेकिन आम जनता की प्रतिक्रिया इस पर मिली-जुली रही है। कुछ लोग इसे सरकार की सकारात्मक पहल मानते हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा। वहीं, बड़ी संख्या में लोग इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं।
