#यूटिलिटी
March 8, 2026
हिमाचल में नया नियम लागू : मनमानी फीस वसूल नहीं कर पाएंगे लोकमित्र केंद्र, रद्द हो जाएगा लाइसेंस
आम लोगों को मिलेगी बेहतर डिजीटल सुविधा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आम लोगों को डिजिटल सेवाएं पारदर्शी और बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल प्रदेश में अब लोकमित्र केंद्र संचालक मनमानी फीस वसूल नहीं कर पाएंगे।
दरअसल, प्रदेश के करीब 7900 लोकमित्र केंद्रों और आधार नामांकन केंद्रों की निगरानी के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर SOP जारी की गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराना, अनियमितताओं पर रोक लगाना और अतिरिक्त शुल्क वसूली जैसी शिकायतों को समाप्त करना है।
डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस की ओर से जारी इस SOP में स्पष्ट किया गया है कि लोकमित्र केंद्रों और आधार ऑपरेटरों की कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखी जाएगी। साथ ही किसी भी तरह की शिकायत या अनियमितता सामने आने पर तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकार को अक्सर यह शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ लोकमित्र केंद्र निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल रहे हैं या सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं करवा रहे। नई SOP के तहत ऐसे मामलों में अब सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
अगर कोई लोकमित्र केंद्र सरकारी दरों से अधिक शुल्क लेते हुए पाया जाता है तो पहली बार उसकी CSC ID एक महीने के लिए ब्लॉक कर दी जाएगी और केंद्र संचालक को चेतावनी जारी की जाएगी। अगर इसके बाद भी अनियमितता दोहराई जाती है तो निलंबन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। गंभीर या लगातार उल्लंघन के मामलों में CSE ID को स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत आधार नामांकन से जुड़े ऑपरेटरों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आधार ऑपरेटरों को केवल अधिकृत सरकारी परिसरों से ही काम करने की अनुमति होगी। उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा निर्धारित स्थान और संचालन संबंधी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
अगर कोई ऑपरेटर स्वीकृत स्थान के बाहर आधार नामांकन या अपडेट से जुड़ी गतिविधियां करता पाया जाता है या किसी प्रकार की फर्जी नामांकन प्रक्रिया में शामिल होता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में ऑपरेटर को तत्काल निलंबित किया जा सकता है और आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि सभी लोकमित्र केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं की सरकारी दर सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
इससे नागरिकों को यह पता रहेगा कि किस सेवा के लिए कितना शुल्क निर्धारित है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी सेवा के लिए भुगतान करने से पहले केंद्र पर लगी दर सूची की जांच जरूर करें, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से अधिक राशि न देनी पड़े।
निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। प्रत्येक जिले में नियुक्त ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को हर तीन महीने में कम से कम 15 लोकमित्र केंद्रों का यादृच्छिक निरीक्षण करना होगा।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी केंद्रों पर मौजूद नागरिकों से भी बातचीत करेंगे और यह जांच करेंगे कि उनसे निर्धारित शुल्क ही लिया जा रहा है या नहीं। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता का भी आकलन किया जाएगा।
राज्य में इस समय लगभग 7900 लोकमित्र केंद्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जहां नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर कई अन्य सरकारी सेवाओं से संबंधित कार्य शामिल हैं। नई SOP का उद्देश्य इन केंद्रों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है- ताकि प्रदेश के हर नागरिक को भरोसेमंद और समयबद्ध डिजिटल सेवाएं मिल सकें।
अगर किसी नागरिक को लोकमित्र केंद्र या आधार सेवा से संबंधित कोई समस्या आती है, तो वह अपनी शिकायत मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन नंबर 1100, आधिकारिक शिकायत पोर्टल, ईमेल या जिला प्रशासन के माध्यम से दर्ज कर सकता है।
शिकायत मिलने के बाद जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी संबंधित ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश देगी। जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन राजस्व विभाग या अन्य संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र जांच भी करवा सकता है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य के डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस को भेजी जाएंगी।