बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब इस विवाद में एक और कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने विक्रमादित्य सिंह को कड़ी नसीहत देते हुए साफ कहा कि प्रदेश का शासन अधिकारियों, सरकार और व्यवस्था के सामंजस्य से चलता है, न कि बयानबाजी से।
विक्रमादित्य का बयान अनावश्यक
बिलासपुर के बराड़ी में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह का बयान न सिर्फ अनावश्यक था, बल्कि सरकार और पार्टी दोनों के लिए नुकसानदेह भी साबित हुआ है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी मर्जी से किसी राज्य में तैनात नहीं होते, बल्कि उनकी नियुक्ति भारत सरकार करती है। ऐसे में आल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की भूमिका को कमतर आंकना सही नहीं है।
सीएम के समक्ष रखना चाहिए था अपना पक्ष
धर्माणी ने कहा कि, यदि किसी मंत्री को किसी अधिकारी की कार्यशैली से आपत्ति है, तो उसे मीडिया में बयान देने के बजाय कैबिनेट बैठक या मुख्यमंत्री के समक्ष रखना चाहिए था। सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणियां करने से गलत संदेश जाता है और इसका असर प्रदेश से बाहर काम कर रहे हिमाचल के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी पड़ता है।
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उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल के कई अधिकारी देश के अन्य राज्यों में चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और बड़े पदों पर रह चुके हैं, जो राज्य की साख को दर्शाता है।
अन्य राज्यों के साथ संबंधों पर भी डाल सकते हैं असर
राजेश धर्माणी ने यह भी कहा कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधानपालिका के आपसी संतुलन से ही शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है। इस तरह के बयान न केवल सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करते हैं, बल्कि अन्य राज्यों के साथ संबंधों पर भी असर डाल सकते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि विकास के लिए हिमाचल को कई मामलों में दूसरे राज्यों और केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है, ऐसे में शब्दों की मर्यादा जरूरी है।
डिप्टी सीएम सहित ये मंत्री भी दे चुके हैं अपनी राय
इससे पहले भी विक्रमादित्य सिंह के बयान से कांग्रेस के कई मंत्री खुद को अलग कर चुके हैं। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने बयान से दूरी बना ली थी, जबकि मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसे गलत ठहराया। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने तो और आगे बढ़ते हुए कहा था कि अगर किसी मंत्री से अफसरों से काम नहीं हो पा रहा, तो इसकी जिम्मेदारी बयान देने वालों को खुद लेनी चाहिए।
फ़ेसबुक पोस्ट से उपजा विवाद
गौरतलब है कि 12 जनवरी को विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि यूपी और बिहार से आए कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी हिमाचल के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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विवाद बढ़ने पर उन्होंने अधिकारियों के नाम सार्वजनिक करने की बात भी कही थी। इस पर आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उनके साथ तैनाती न करने की मांग की थी। इसके बावजूद विक्रमादित्य सिंह ने बाद में भी अपने बयान पर कायम रहने की बात कही।
