#राजनीति
June 1, 2026
सीएम सुक्खू गृह जिला तो छोड़ो...अपना विधानसभा क्षेत्र भी नहीं बचा पाए, 19 में से 15 सीटें हारी
जिला में 19 में 15 सीटें हारीं, नादौन में 4 में मिली मात्र एक सीट
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार हुए जमीनी स्तर के सबसे बड़े सियासी इम्तिहान में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। प्रदेश में पूर्ण बहुमत की कांग्रेस सरकार होने के बावजूद] नगर निगमों और जिला परिषद के चुनावों में सत्तारूढ़ कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला झटका सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लगा है। सीएम सुक्खू के अपने गृह जिला हमीरपुर में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन पूरी तरह खिसक गई है। यहां की जागरूक जनता ने मुख्यमंत्री के रसूख पर पूरी तरह से ब्रेक लगाते हुए एकतरफा फैसला सुनाया है।
हमीरपुर जिला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का गृह क्षेत्र है, और राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा था कि सत्ता का लाभ कांग्रेस को मिलेगा। लेकिन जब नतीजे सामने आए तो हर कोई दंग रह गया। हमीरपुर जिला परिषद के कुल 19 वार्डों में से भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने एकतरफा दबदबा बनाते हुए 15 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, प्रदेश में सरकार होने के बावजूद कांग्रेस मात्र 4 सीटों (निर्दलीयों सहित) पर सिमट कर रह गई। इस करारी शिकस्त ने न सिर्फ संगठन की कमजोरी को उजागर किया है, बल्कि मुख्यमंत्री की साख को भी गहरा धक्का पहुंचाया है।
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इस चुनाव परिणाम का सबसे दर्दनाक पहलू मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र नादौन से सामने आया। नादौन विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले 4 जिला परिषद वार्डों— लहड़ा, मालग, अमलैहड़ और सपड़ोह में मुकाबला बेहद दिलचस्प था। लेकिन जनता ने यहां मुख्यमंत्री को उनके अपने ही घर में मात दे दी। इन 4 महत्वपूर्ण सीटों में से 3 पर कांग्रेस प्रत्याशियों को करारी हार का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि, सीएम के अपने वार्ड अमलैहड़ से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रविंद्र कुमार को मिली जीत ने पार्टी को डूबने से थोड़ी राहत जरूर दी है।
चुनाव परिणामों ने यह भी दर्शाया है कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ता नेटवर्क के बल पर लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए है। कई वार्डों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने उल्लेखनीय अंतर से जीत हासिल की, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह परिणाम प्रदेश सरकार की नीतियों के प्रति जनता की नाराजगी और भाजपा के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत है। वहीं कांग्रेस के लिए यह परिणाम आगामी राजनीतिक चुनौतियों की चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।
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15 सीटों पर जीत के साथ भाजपा समर्थित खेमे ने जिला परिषद हमीरपुर में स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी भाजपा की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संख्या बल के आधार पर जिला परिषद की कमान भाजपा समर्थित सदस्यों के हाथों में जाने की संभावना प्रबल हो गई है। हालांकि औपचारिक निर्णय निर्वाचित सदस्यों की बैठक और आगामी चुनावी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा, लेकिन मौजूदा आंकड़े भाजपा के पक्ष में स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहे हैं।
हमीरपुर जिला परिषद चुनाव के नतीजे प्रदेश की राजनीति में दूरगामी प्रभाव डालने वाले माने जा रहे हैं। सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस का अपने ही मुख्यमंत्री के गृह जिले में कमजोर प्रदर्शन कई सवाल खड़े कर रहा है। दूसरी ओर भाजपा ने इन परिणामों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उसका जनाधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। अब राजनीतिक नजरें जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव पर टिकी हुई हैं, लेकिन इतना तय है कि हमीरपुर से आए चुनावी नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।