#राजनीति
May 27, 2026
हिमाचल में 'शर्मा जी' का जलवा: 40 साल से नहीं हारे एक भी चुनाव, 76 की उम्र में फिर बने प्रधान
अब तक नहीं हारे एक भी चुनाव, प्रधान बीडीसी और जिला परिषद का लड़ा चुनाव
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण के परिणाम सामने आने के बाद कई दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानियां चर्चा में हैं। कहीं एक ही परिवार ने पंचायत की कमान संभाली तो कहीं दशकों पुराना जनविश्वास फिर से मतपेटियों में दिखाई दिया। ऐसा ही एक रोचक मामला ऊना जिले से सामने आया है, जहां एक नेता ने फिर साबित कर दिया कि राजनीति में सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा होता है।
ऊना जिले की धुसाड़ा पंचायत के 76 वर्षीय सतीश शर्मा ने एक बार फिर चुनावी मैदान में जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया है। खास बात यह है कि पिछले करीब 40 वर्षों के राजनीतिक सफर में वह एक भी चुनाव नहीं हारे हैं। इस बार भी उन्होंने प्रधान पद का चुनाव जीतकर अपने अजेय रिकॉर्ड को बरकरार रखा है।
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इस बार के पंचायत चुनाव में वह आठवीं बार चुनावी मैदान में उतरे थे। मंगलवार को जब नतीजे घोषित हुए, तो उन्होंने एक बार फिर इतिहास रचते हुए धुसाड़ा पंचायत के प्रधान पद पर शानदार जीत हासिल की। 76 वर्ष की इस आयु में भी जब वह चुनाव प्रचार के लिए निकलते हैं, तो उनका जज्बा और ऊर्जा किसी युवा नेता से कम नहीं नजर आती।
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सतीश शर्मा का राजनीतिक सफरनामा बेहद दिलचस्प है। वह अपनी जिंदगी में अब तक जितने भी चुनावों में उतरे, जनता ने उन्हें कभी निराश नहीं किया। उनके चुनावी करियर पर एक नज़र डालें तो
अपनी इस ऐतिहासिक और लगातार जारी जीत पर बेहद शालीनता से बात करते हुए सतीश शर्मा कहते हैं कि यह मेरी कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इलाके के लोगों का मेरे प्रति अगाध स्नेह और विश्वास है। सच कहूं तो मैं खुद चुनावी समर से बाहर होना चाहता हूं, लेकिन हर बार चुनाव आते ही ग्रामीण एकजुट होकर आ जाते हैं और मुझसे चुनाव लड़ने का आग्रह करते हैं। जनता के इसी प्यार के ऋण को चुकाने के लिए मैं पंचायती राज प्रणाली के माध्यम से अंतिम सांस तक लोगों की सेवा में जुटा रहूंगा।
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हिमाचल के इस दिलचस्प मामले से एक बात तो साफ है कि आज के दौर में जहां राजनीति के मायने बदल रहे हैं, वहीं ग्रामीण स्तर पर आज भी व्यक्ति का व्यवहार और उसकी सामाजिक सक्रियता ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। सतीश शर्मा लगातार लोगों के सुख-दुख में उनके बीच बने रहते हैं, यही वजह है कि पीढ़ी दर पीढ़ी बदलने के बाद भी जनता हर बार अपना प्रतिनिधित्व सौंपने के लिए उन्हीं पर भरोसा जताती है।