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January 16, 2026

अपने बयान पर घिरे विक्रमादित्य को मिला शिक्षा मंत्री का सहयोग, CM सुक्खू समेत 4 मंत्रियों ने झाड़ा पल्ला

मंत्री रोहित बोले- CM को विक्रमादित्य के डाउट्स क्लियर करने चाहिए

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Vikramaditya Singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर जारी विवाद अब कैबिनेट के भीतर साफ तौर पर बंटवारे की तस्वीर पेश कर रहा है। यूपी-बिहार के कुछ IAS-IPS अधिकारियों को लेकर दिए गए विक्रमादित्य सिंह के बयान पर जहां अधिकांश मंत्री खुलकर असहमति जता चुके हैं, वहीं अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर उनके समर्थन में सामने आए हैं।

CM को विक्रमादित्य के डाउट्स क्लियर करने चाहिए

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह को एक “एफ़िशिएंट मंत्री” करार देते हुए कहा कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उन पर मुख्यमंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। रोहित ठाकुर का कहना है कि मुख्यमंत्री को विक्रमादित्य सिंह के डाउट्स क्लियर करने चाहिए, ताकि सरकार और प्रशासन के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति न बने।

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हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश के निर्माण और विकास में IAS और IPS अधिकारियों का योगदान बेहद अहम रहा है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। रोहित ठाकुर ने कहा कि नकारात्मक सोच किसी एक वर्ग या ऑल इंडिया सर्विस तक सीमित नहीं होती। यह प्रवृत्ति प्रदेश से जुड़े लोगों में भी हो सकती है। उनका इशारा इस ओर था कि समस्या को क्षेत्रीय चश्मे से देखने के बजाय सिस्टम के भीतर मौजूद खामियों पर ध्यान देना जरूरी है।

यह बोले थे सीएम सुक्खू

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंत्री-अफसर विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि सरकार और अधिकारियों के बीच कोई टकराव नहीं है।

 

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दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी-कभी इस तरह की बातें सामने आ जाती हैं, लेकिन उन पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश के अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है।

तीन मंत्री विक्रमादित्य से असहमत

इस विवाद में अब तक राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी विक्रमादित्य सिंह के बयान से असहमति जता चुके हैं। अनिरुद्ध सिंह और विक्रमादित्य सिंह के बीच तो जुबानी जंग भी देखने को मिली, जिसने कांग्रेस सरकार के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया। राजस्व मंत्री जगत नेगी ने कहा कि जिन लोगों पर कानून और नियम बनाने की जिम्मेदारी है, उन्हें इस तरह के सार्वजनिक आरोपों से बचना चाहिए।

 

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उन्होंने IPS एसोसिएशन की उस मांग को भी अनुचित बताया, जिसमें मंत्री विक्रमादित्य के साथ ड्यूटी न लगाने की बात कही गई थी। नेगी ने जानकारी दी कि 19 जनवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी।

एक पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि, यह विवाद तब शुरू हुआ, जब विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कुछ यूपी-बिहार के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और उन्हें “शासक न बनने” की नसीहत दी थी। इसके बाद न केवल कैबिनेट मंत्री आमने-सामने आए, बल्कि IAS-IPS अधिकारी संघ भी खुलकर विरोध में उतर आया। IPS एसोसिएशन ने मंत्री के बयान को विभाजनकारी बताते हुए सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की।

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