#राजनीति
May 31, 2026
विक्रमादित्य सिंह भी ध्वस्त नहीं कर पाए जयराम का अभेद्य दुर्ग, धुआंधार प्रचार से मिली मात्र एक सीट
"मंडी भाजपा की है और रहेगी" जयराम ठाकुर की कही बात हुई सच
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति को बड़ा संदेश दे दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा से जुड़े इन चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था, क्योंकि यह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के ढाई साल के कार्यकाल का पहला बड़ा शहरी इम्तिहान भी था। लेकिन जनता के फैसले ने भाजपा के पक्ष में स्पष्ट झुकाव दिखाते हुए कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया।
चार नगर निगमों में हुए चुनाव में भाजपा ने तीन नगर निगमों में शानदार प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक बढ़त हासिल कर ली, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर तक सिमट गई। सबसे ज्यादा चर्चा मंडी नगर निगम के परिणामों की रही, जहां मुकाबला केवल सीटों का नहीं बल्कि दो बड़े राजनीतिक चेहरों की प्रतिष्ठा का बन गया था।
इस पूरे चुनाव में सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी में देखने को मिला। कांग्रेस बहुत अच्छे से जानती थी कि अगर 2027 के 'फाइनल' की राह आसान करनी है, तो जयराम ठाकुर के इस मजबूत किले में सेंध लगाना बेहद जरूरी है।
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इसी रणनीति के तहत सुक्खू सरकार ने मंडी के इस अभेद्य दुर्ग को ध्वस्त करने के लिए अपने सबसे तेज-तर्रार नेता और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मैदान में उतारा था। विक्रमादित्य सिंह ने चुनाव की कमान खुद संभाली और लगातार धुआंधार प्रचार किया। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा था कि विक्रमादित्य का युवा जोश जयराम के प्रभाव को चुनौती देगा, लेकिन जब नतीजे ईवीएम से बाहर आए तो मंडी में विक्रमादित्य सिंह का जादू पूरी तरह बेअसर साबित हुआ।
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मंडी नगर निगम की 14 सीटों में से 12 पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। कांग्रेस सिर्फ एक सीट पर सिमट गई, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। इन नतीजों ने न केवल भाजपा की मजबूत पकड़ को साबित किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि मंडी में जयराम ठाकुर का प्रभाव आज भी कायम है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकने के बावजूद जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह पार्टी की उम्मीदों से काफी पीछे रहा। पिछले चुनाव की तुलना में कांग्रेस का प्रदर्शन और कमजोर हुआ है।
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नतीजों के बाद उत्साहित जयराम ठाकुर ने कहा कि जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मंडी और भाजपा का रिश्ता अटूट है। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने चुनाव से पहले जो कहा था, जनता ने उस पर अपनी मुहर लगा दी। जयराम ठाकुर ने कहा कि "मंडी भाजपा की थी, भाजपा की है और भाजपा की ही रहेगी।" उन्होंने इसे भाजपा की नीतियों, संगठन की ताकत और जनता के विश्वास की जीत बताया।
नगर निगम चुनावों को प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा था। भाजपा ने धर्मशाला और मंडी में शानदार प्रदर्शन किया, वहीं सोलन में पहली बार मजबूत उपस्थिति दर्ज कर कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा दी। पालमपुर में कांग्रेस को राहत जरूर मिली, लेकिन समग्र तस्वीर भाजपा के पक्ष में जाती दिखाई दी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन परिणामों ने कांग्रेस सरकार के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरी मतदाताओं के रुझान ने संकेत दिया है कि सरकार को आने वाले समय में जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।
मंडी के नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर कांग्रेस की रणनीति कहां कमजोर पड़ गई। जिस सीट को कांग्रेस ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था और जहां विक्रमादित्य सिंह ने पूरी ताकत झोंकी थी, वहीं भाजपा ने सबसे बड़ी जीत दर्ज कर दी। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा जोरों पर है कि जयराम ठाकुर के गढ़ में विक्रमादित्य सिंह का जादू नहीं चल पाया। कांग्रेस ने जिस मिशन के तहत मंडी में पूरा जोर लगाया था, वह जनता के फैसले के सामने टिक नहीं सका।
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भाजपा इस जीत को आगामी विधानसभा चुनावों की भूमिका के रूप में देख रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जनता ने कांग्रेस सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है, जबकि कांग्रेस इन परिणामों को स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर देख रही है। फिलहाल इतना तय है कि नगर निगम चुनावों ने हिमाचल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सत्ता के सेमीफाइनल में भाजपा ने बढ़त बना ली है और मंडी के नतीजों ने जयराम ठाकुर को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।