#राजनीति
January 16, 2026
खड़गे की CM सुक्खू को दो टूक : बोले- बिखरती कैबिनेट को एकजुट करो, विस्तार पर भी हुआ मंथन
खड़गे की नसीहत : बढ़ते मतभेदों को तुरंत संभालने की जरूरत
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नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश की सियासत में मचे घमासान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से हुई मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे वक्त में हुई है, जब प्रदेश में मंत्री-अफसर विवाद, कैबिनेट के भीतर बढ़ती असहजता, संगठनात्मक ढांचे की कमी और लंबे समय से अटके कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच पैदा हुए तनाव पर भी दोनों नेताओं के बीच खुलकर बात हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री सुक्खू को साफ शब्दों में संदेश दिया कि सरकार के भीतर बढ़ते मतभेदों को तुरंत संभालने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि कैबिनेट को एकजुट रखना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है और आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर आने से हर हाल में रोका जाना चाहिए। खड़गे ने सलाह दी कि ऐसे विवादों को कैबिनेट के भीतर समन्वय और संवाद के जरिए सुलझाया जाए, ताकि पार्टी और सरकार की छवि को नुकसान न पहुंचे।
बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। सुक्खू सरकार के गठन के तीन साल बाद भी मंत्रिमंडल का एक पद खाली है, जिसे लेकर संगठन के भीतर भी असंतोष की आवाजें उठती रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि जल्द ही कैबिनेट में फेरबदल कर इस खाली पद को भरा जा सकता है। चर्चा यह भी है कि राजनीतिक संतुलन साधने के लिए एक मौजूदा मंत्री को हटाकर उनके पुत्र को किसी बोर्ड या निगम में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसा हुआ तो दो नए विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है।
कैबिनेट मंत्री पद की दौड़ में कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह पहले मुख्य संसदीय सचिव रह चुके हैं और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
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इसके अलावा ज्वालाजी से विधायक संजय रत्न और पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल के नामों पर भी विचार होने की चर्चा है। यदि किसी मंत्री को ड्रॉप किया गया तो अर्की से विधायक और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले संजय अवस्थी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
बैठक में डिप्टी स्पीकर पद को भरने पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस विधायक विनय कुमार के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से यह पद खाली है। इसके अलावा बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन को मजबूती देने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया।