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May 30, 2026

कल खुलेगा सत्ता के सेमीफाइनल का पिटारा: कांग्रेस-भाजपा की दांव पर साख; नतीजों पर टिकी हिमाचल की नजरें

कांग्रेस भाजपा के भविष्य का रोडमैप तय करेंगे रिजल्ट

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सियासत में सत्ता के सेमीफाइनल का महामुकाबला अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। प्रदेश की राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है, इसका फैसला कल यानी 31 मई को होने जा रहा है। सूबे की सुक्खू सरकार और मुख्य विपक्षी दल भाजपा, दोनों की साख दांव पर लगी है। जहां एक तरफ 1,769 पंचायत समिति (BDC) और 251 जिला परिषद सीटों के लिए मतगणना की घड़ी नजदीक आ गई है।

चार नगर निगमों पर टिकी सबकी नजर

वहीं दूसरी ओर असली सियासी घमासान चार प्रमुख नगर निगमों—मंडी, धर्मशाला, सोलन और पालमपुर—के नतीजों को लेकर है। चूंकि नगर निगम के चुनाव सीधे पार्टी सिंबल (चुनाव चिह्न) पर लड़े गए हैं, इसलिए इनके परिणाम दिसंबर 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा तय करने में सबसे बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' साबित होंगे।

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कांग्रेस भाजपा के भविष्य का रोडमैप तय करेंगे रिजल्ट

इस चुनावी समर के परिणाम दोनों ही राजनीतिक दलों के भविष्य का रोडमैप तैयार करेंगे। यदि इन चार नगर निगमों (एमसी) में सत्ताधारी कांग्रेस बाजी मारती है, तो इसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साढ़े तीन साल के कार्यकाल और नीतियों पर जनता की सीधी मुहर माना जाएगा। यह जीत कांग्रेस के लिए 'मिशन रिपीट' की राह आसान करने वाली संजीवनी साबित होगी। इसके विपरीत, यदि भाजपा मंडी, सोलन और धर्मशाला में भगवा लहराने में कामयाब रहती है, तो यह सुक्खू सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा। ऐसी स्थिति में भाजपा को आने वाले समय में कांग्रेस की अधूरी चुनावी गारंटियों के नाम पर सरकार को चौतरफा घेरने का एक बड़ा और मजबूत हथियार मिल जाएगा।

 

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सुक्खू सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

नगर निगम चुनाव कांग्रेस सरकार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं माने जा रहे। सरकार को बने साढ़े तीन साल से अधिक का समय हो चुका है और विपक्ष लगातार चुनावी गारंटियों, आर्थिक स्थिति तथा विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में यदि कांग्रेस चार नगर निगमों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को राजनीतिक मजबूती मिलेगी। वहीं कमजोर प्रदर्शन सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

भाजपा के लिए भी कई मायनों में अहम मुकाबला

दूसरी ओर भाजपा भी इन चुनावों को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही है। खासकर मंडी और धर्मशाला नगर निगम के नतीजों पर पार्टी की विशेष नजर है। मंडी पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला है। ऐसे में यहां भाजपा की जीत पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जाएगी। वहीं धर्मशाला में भाजपा की साख कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं और स्थानीय नेतृत्व से भी जुड़ी हुई है। यदि भाजपा यहां अच्छा प्रदर्शन करती है तो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उसका मनोबल काफी बढ़ जाएगा।

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जिला परिषद और बीडीसी चुनावों की भी होगी गिनती

नगर निगम चुनावों के साथ-साथ रविवार सुबह 9 बजे से प्रदेशभर के 91 विकास खंडों में जिला परिषद और पंचायत समिति (बीडीसी) चुनावों की मतगणना भी शुरू होगी। राज्य में 251 जिला परिषद और 1769 बीडीसी सदस्यों के भाग्य का फैसला मतगणना के बाद सामने आएगा। मतगणना के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जिला परिषद वार्डों में मतों की संख्या को देखते हुए कई-कई टेबल लगाई गई हैं, जबकि बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों को मतगणना कार्य में लगाया गया है।

कौन मारेगा बाजी, कुछ घंटों में साफ होगी तस्वीर

राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने दावे कर रहे हैं। कांग्रेस जहां शहरी निकायों और पंचायत चुनावों में बढ़त का दावा कर रही है, वहीं भाजपा भी अपने पक्ष में परिणाम आने की बात कह रही है। अब सभी दावों और राजनीतिक अटकलों पर रविवार को विराम लग जाएगा। मतगणना शुरू होते ही प्रदेश की राजनीति का तापमान और बढ़ेगा तथा दोपहर तक चारों नगर निगमों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।

 

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2027 विधानसभा चुनाव का पहला बड़ा संकेत

राजनीतिक जानकारों की मानें तो रविवार को आने वाले नतीजे केवल स्थानीय निकायों के परिणाम नहीं होंगे, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड का पहला बड़ा संकेत भी साबित हो सकते हैं। इसी वजह से पूरे प्रदेश की नजरें मतगणना केंद्रों पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि सत्ता के इस सेमीफाइनल में कांग्रेस अपनी बढ़त कायम रखती है या भाजपा वापसी का मजबूत संदेश देने में सफल होती है। प्रदेश की राजनीति का यह सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला अगले कुछ घंटों में नई तस्वीर पेश करने वाला है।

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