#राजनीति
May 27, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव: ससुर-बहू की जोड़ी ने तीसरी बार रचा इतिहास; यहां ननद पर भारी पड़ी भाभी
पंचायत चुनावों में रिश्तों की परीक्षा, ससुर बहू की जोड़ी पर जनता को भरोसा
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मंडी/शिमला। हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के पहले चरण का मतदान संपन्न होने के बाद चुनावी नतीजे हर किसी को हैरान और लकीर से हटकर सोचने पर मजबूर कर रहे हैं। लोकतंत्र के इस सबसे जमीनी उत्सव में देवभूमि से कई ऐसी दिलचस्प और अनोखी तस्वीरें सामने आई हैं, जो यह साबित करती हैं कि गांव की राजनीति में रिश्ते और जनमत किस कदर एक-दूसरे में घुले-मिले हैं।
इन नतीजों में कहीं परिवार के लोग एक-दूसरे के सारथी बनकर उभरे, तो कहीं एक-दूसरे के सामने ताल ठोकते नजर आए। मंडी के सुंदरनगर में जहां 'ससुर-बहू' की जोड़ी ने एक बार फिर एक साथ जीत का परचम लहराकर कमाल कर दिया, वहीं रामपुर के ज्यूरी त्यावल में 'ननद-भाभी' के बीच हुए दिलचस्प मुकाबले में भाभी ने ननद को बड़े अंतर से शिकस्त देकर प्रधान पद का ताज अपने नाम कर लिया।
मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल की चनोल पंचायत में एक बार फिर जनता ने ससुर-बहू की जोड़ी पर भरोसा जताया है। पंचायत चुनाव के परिणामों में बहू नीलम ठाकुर प्रधान चुनी गईं, जबकि उनके ससुर शंकर सिंह ने उपप्रधान पद पर जीत हासिल कर पंचायत की कमान अपने परिवार के हाथों में बनाए रखी। नीलम ठाकुर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 196 मतों के बड़े अंतर से हराया, जबकि शंकर सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 41 वोटों से जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया।
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इस जीत की सबसे खास बात शंकर सिंह का लंबा जनसेवा सफर है। आगामी 30 जून को 90 वर्ष की आयु पूरी करने जा रहे शंकर सिंह पिछले लगभग पांच दशकों से पंचायत राजनीति का अहम चेहरा बने हुए हैं। उन्होंने वर्ष 1973 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और तब से लेकर आज तक ग्रामीणों के बीच उनकी सादगी, सहज व्यवहार और विकास कार्यों को लेकर अलग पहचान बनी हुई है।
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स्थानीय लोग बताते हैं कि शंकर सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका विनम्र स्वभाव और हर व्यक्ति की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना है। इसी विश्वास का परिणाम है कि आज भी ग्रामीण उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनने में संकोच नहीं करते। वहीं बहू नीलम ठाकुर भी पहले पंचायत प्रधान और जिला परिषद सदस्य के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। यही कारण रहा कि इस बार भी जनता ने दोनों पर भरोसा जताकर पंचायत की बागडोर उनके हाथों में सौंप दी।
जहां मंडी में ससुर-बहू की जोड़ी जीत की मिसाल बनी, वहीं शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र की ज्यूरी त्यावल पंचायत में रिश्तों का एक अलग ही चुनावी मुकाबला देखने को मिला। यहां प्रधान पद के लिए ननद और भाभी आमने-सामने थीं। पूरे चुनाव के दौरान यह मुकाबला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

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आखिरकार जब मतगणना पूरी हुई तो भाभी राज कांता ने शानदार जीत दर्ज करते हुए अपनी ननद कांता नेगी को बड़े अंतर से पराजित कर दिया। राज कांता को कुल 635 मत मिले, जबकि कांता नेगी को 335 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस तरह भाभी ने 300 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर पंचायत की कमान अपने हाथ में ले ली।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने पंचायत विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया था। पेयजल, सड़क, स्वच्छता और युवाओं के लिए बेहतर सुविधाओं जैसे विषयों पर दोनों ने ग्रामीणों से समर्थन मांगा। हालांकि मतदान के दिन जनता ने स्पष्ट रूप से राज कांता के पक्ष में फैसला सुनाया। जीत के बाद उन्होंने पंचायतवासियों का आभार जताते हुए कहा कि वह बिना किसी भेदभाव के पूरे पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करेंगी।
पहले चरण के पंचायत चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गांवों की राजनीति में रिश्ते जरूर अहम होते हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के विश्वास और उम्मीदवार की छवि पर ही निर्भर करता है। मंडी में जहां ससुर-बहू की जोड़ी ने जनता का भरोसा जीतकर पंचायत की कमान संभाली, वहीं रामपुर में ननद-भाभी के मुकाबले में भाभी ने बाजी मार ली। इन रोचक नतीजों ने हिमाचल के पंचायत चुनावों को और भी दिलचस्प बना दिया है और अब प्रदेशभर में इन्हीं चुनावी कहानियों की चर्चा हो रही है।