मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आयोजित राज्य स्तरीय छेशचू मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विविधता और राजनीतिक चर्चाओं का संगम बन गया। रिवालसर में आयोजित इस तीन दिवसीय मेले में जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु झील किनारे स्थित मठों और मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़े। वहीं दूसरी ओर आयोजन की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों ने इस मेले को सुर्खियों में ला दिया।
सुक्खू सरकार पर बरसे BJP MLA
बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने मेले को राज्य स्तरीय दर्जा दिए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह रिवालसर और मंडी जिला ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि पारंपरिक छेशचू मेले को व्यापक पहचान मिली है।
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बोले- अपमानित किया गया
हालांकि, उन्होंने आयोजन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया गया। उनके अनुसार, निमंत्रण पत्र उनके निवास स्थान पर बिना पूर्व सूचना के छोड़ दिया गया, जिसे उन्होंने “व्यवस्था में कमी” बताया।
घर के बाहर फेंके निमंत्रण
उन्होंने कहा कि अगर मेला राज्य स्तरीय स्वरूप में आयोजित हो रहा था, तो क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करना आयोजकों और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अक्सर “व्यवस्था परिवर्तन” के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रोटोकॉल का पालन नहीं होना इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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“व्यवस्था परिवर्तन” के दावों पर कटाक्ष
उन्होंने इसे व्यक्तिगत मुद्दा न बताते हुए संस्थागत शिष्टाचार का विषय बताया। उनका कहना था कि ऐसे आयोजनों में सभी जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए- ताकि किसी भी प्रकार की असहज स्थिति पैदा न हो और आयोजन की गरिमा अक्षुण्ण रहे।
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प्रशासन और मेला कमेटी के रवैये पर सवाल
गांधी ने प्रशासन और मेला कमेटी के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि छेशचू मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। रिवालसर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व इसे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष बनाता है।
उन्होंने यह भी माना कि इस बार मेले की भव्यता बढ़ाने के लिए विभिन्न मंदिरों और बौद्ध मठों से सहयोग लिया गया, जो एक सकारात्मक पहल है। मगर, आयोजन की औपचारिकताओं में पारदर्शिता और समन्वय की कमी नहीं होनी चाहिए थी।
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वैसाखी मेले को भी मिले राज्य स्तरीय दर्जा
विधायक गांधी ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार छेशचू मेले को राज्य स्तरीय विस्तार दिया गया है, उसी प्रकार अप्रैल में आयोजित होने वाले वैसाखी मेले को भी व्यापक पहचान दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैसाखी मेला क्षेत्र की आस्था, कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। अगर उसे भी राज्य स्तरीय दर्जा मिले, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बल मिलेगा।
दोबारा ना हो ऐसा...
गांधी ने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उनका मानना है कि बेहतर समन्वय से न केवल आयोजन सफल होगा, बल्कि राजनीतिक विवादों से भी बचा जा सकेगा।
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फिर छिड़ी राजनीतिक बहस
फिलहाल, रिवालसर में संपन्न हुआ यह छेशचू मेला धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के बीच राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और मेला कमेटी इन उठे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और भविष्य में किस तरह की कार्यप्रणाली अपनाई जाती है।
