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March 1, 2026

हिमाचल : सड़क हाद.से में बेटे ने तोड़ा दम, बेबस मां को कोर्ट ने दिलाया हक- 15 लाख मिला मुआवजा

वाहन मालिक देगा युवक की मां को पैसे

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मंडी। हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले के सुंदरनगर स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने 24 वर्षीय युवक की असमय मौत के मामले में उसकी मां को 15,76,400 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

बेबस मां को कोर्ट ने दिलाया हक

इतना ही नहीं इस मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। यह राशि वाहन मालिक को स्वयं अदा करनी होगी, क्योंकि कोर्ट ने बीमा कंपनी को इस दायित्व से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।

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सड़क हादसे में बेटे की मौत

यह दुर्घटना 18 मार्च 2023 को हुई थी। मृतक बहादुर सिंह एक महिंद्रा पिकअप वाहन में सवार होकर जा रहा था। जैसे ही वाहन चलौणी क्षेत्र के समीप पहुंचा, चालक राजेश कुमार की तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण गाड़ी नियंत्रण से बाहर हो गई।

मां पर टूटा दुखों का पहाड़

देखते ही देखते वाहन सड़क से लगभग 300 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि बहादुर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन युवक को बचाया नहीं जा सका। इस दुर्घटना ने परिवार की उम्मीदों को एक झटके में खत्म कर दिया।

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मां ने मांगा था 1 करोड़

मृतक की मां कमला देवी ने अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद न्याय के लिए अदालत का सहारा लिया। याचिका में उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा प्रतिमाह लगभग 25,000 रुपये कमाता था और परिवार का मुख्य सहारा था। इसी आधार पर उन्होंने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की।

15 लाख मिला मुआवजा

हालांकि, अदालत में आय से संबंधित ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ऐसे में अधिकरण ने हिमाचल प्रदेश में लागू न्यूनतम वेतन दरों को आधार मानते हुए आय का आकलन किया और विधिक गणना के बाद कुल 15,76,400 रुपये मुआवजा निर्धारित किया।

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बीमा कंपनी क्यों हुई बरी?

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू मुआवजे की जिम्मेदारी तय करने को लेकर सामने आया। जांच में यह तथ्य स्पष्ट हुआ कि दुर्घटनाग्रस्त महिंद्रा पिकअप एक मालवाहक वाहन था। बहादुर सिंह उसमें एक अनाधिकृत यात्री के रूप में सवार था।

 

अदालत ने माना कि माल ढोने वाले वाहन में सवारी बैठाना बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। चूंकि यह नियमों के खिलाफ था, इसलिए बीमा कंपनी को भुगतान की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।

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वाहन मालिक देगा पैसा

अब मुआवजे की पूरी राशि वाहन मालिक सह चालक को अपनी जेब से अदा करनी होगी। अदालत का यह निर्णय वाहन मालिकों के लिए स्पष्ट संदेश है कि बीमा नियमों की अनदेखी भविष्य में भारी पड़ सकती है।

आधी रकम FD में, आधी नकद

अधिकरण ने बुजुर्ग मां के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भुगतान की व्यवस्था भी तय की है। आदेशानुसार कुल मुआवजा राशि का 50 प्रतिशत भाग कमला देवी के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा किया जाएगा। इससे उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहेगा और आर्थिक सुरक्षा बनी रहेगी। शेष 50 प्रतिशत राशि उन्हें सीधे नकद प्रदान की जाएगी, ताकि वे तत्काल आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

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समाज के लिए सीख

यह फैसला केवल एक परिवार को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन चालकों और मालिकों के लिए भी चेतावनी है। मालवाहक वाहन में अवैध रूप से सवारी बैठाना न केवल खतरनाक है, बल्कि कानूनी और आर्थिक रूप से भी गंभीर परिणाम ला सकता है।

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