शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते सर्पदंश (Snakebite) के मामलों के बीच एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में दुनिया का सबसे खतरनाक माना जाने वाला ईरानी कोबरा (कैस्पियन कोबरा / Naja oxiana) के काटने से दो लोगों की मौत हो गई है। इस कोबरा के काटने और उससे मौत होने का पूरे भारत में यह पहला मामला दर्ज किया गया है।
इस सांप के जहर पर भारत की एंटी.स्नेक वेनम भी बेअसर
दुनिया के बेहद जहरीले कोबरा समूह में शामिल कैस्पियन कोबरा आमतौर पर मध्य एशिया के क्षेत्रों में पाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के चंबा में इसकी मौजूदगी की जेनेटिक पुष्टि पहले ही हो चुकी है। अब इसी प्रजाति के डंक से हुई दो मौतों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण होने के बाद सर्पदंश को लेकर हिमाचल में नई चिंता पैदा हो गई है। हैरानी की बात यह है कि भारत में मौजूद पारंपरिक एंटी-स्नेक वेनम इस दुर्लभ प्रजाति के न्यूरोटॉक्सिक विष पर पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता।
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आईसीएमआर (ICMR) के नेशनल प्रोजेक्ट के तहत हुई इस स्टडी की रिपोर्ट प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल' में प्रकाशित हुई है, जिसने देश के चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। देश में पहली बार कैस्पियन कोबरा के दंश से मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
चंबा में सामने आए दो मामले, दोनों में गई जान
यह मामला हिमाचल के दुर्गम चंबा जिले के दो अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ा है। शोध के दौरान सामने आए दोनों मामलों में पीड़ितों का दिन के समय कैस्पियन कोबरा से अचानक सामना हुआ था। पहला मामला भरमौर क्षेत्र के उल्लांसा गांव का है। 6 जुलाई 2020 की सुबह करीब 40 वर्षीय व्यक्ति अपने बगीचे में स्प्रे करने गया था। इसी दौरान उसका पैर अचानक कैस्पियन कोबरा पर पड़ गया। सांप ने उसके पैर में दो बार डंक मार दिया।
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सर्पदंश के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और सांस लेने में परेशानी होने लगी। लेकिन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन पहले झाड़-फूंक कराने वाले के पास ले गए। इलाज में हुई देरी के बाद तीसरे दिन उसे भरमौर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दूसरी घटना में अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत
दूसरा मामला चंबा के तीसा क्षेत्र के भंजराड़ू गांव का है। 7 जुलाई 2021 को 62 वर्षीय व्यक्ति घर से काम के लिए निकला था। रास्ते में उसका पैर अचानक कैस्पियन कोबरा पर पड़ गया और सांप ने उसके बाएं पैर में डंक मार दिया। सर्पदंश के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। अस्पताल ले जाते समय करीब आधे घंटे के भीतर वह बेहोश हो गया। तीसा सिविल अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पैर पर सांप के दांतों के निशान मिले। चिकित्सकों ने मौत को सांप के विष के न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव से जोड़ा।
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कैस्पियन कोबरा बेहद घातक
कैस्पियन कोबरा को वैज्ञानिक रूप से Naja oxiana कहा जाता है। यह मुख्य रूप से मध्य एशिया में पाया जाने वाला अत्यंत विषैला सांप है। शोध के अनुसार हिमाचल के चंबा क्षेत्र में भी इसकी मौजूदगी सामने आई है। यह प्रजाति अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई वाले खुले और चट्टानी क्षेत्रों में पाई जा सकती है। चंबा की भौगोलिक परिस्थितियां और पीर पंजाल क्षेत्र इसके लिए अनुकूल माने जाते हैं।
मौजूदा एंटी-स्नेक वेनम कितना कारगर?
इस शोध का सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू यह है कि भारत में इस्तेमाल होने वाला मौजूदा एंटी-स्नेक वेनम कैस्पियन कोबरा के विष को पूरी तरह निष्क्रिय करने में पर्याप्त प्रभावी न हो सकता है। इसी कारण इस प्रजाति से जुड़े सर्पदंश मामलों की पहचान, समय पर उपचार और विष के प्रभाव को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, किसी विशेष सांप के काटने पर उपचार का निर्णय चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपलब्ध एंटी-स्नेक वेनम के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
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दो लोगों की जान बची, शोध में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य
शोध में ऐसे दो मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें कैस्पियन कोबरा के डंक के बावजूद पीड़ित बच गए। एक मामले में करीब 25 वर्षीय स्नेक कैचर को सांप का रेस्क्यू करते समय हाथ में डंक लगा था। कैस्पियन कोबरा ने उसके अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच काटा। बताया गया है कि लगभग 15 मिनट के भीतर युवक बेहोश हो गया था।
एक अन्य पुराने मामले में करीब 45 वर्षीय स्नेक हीलर को भी इस प्रजाति ने काटा था। इन मामलों में स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल की गई कुछ हर्बल उपचार पद्धतियों का उल्लेख शोध में किया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ऐसी जड़ी-बूटियों की प्रभावशीलता को प्रमाणित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है।
पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती की टीम ने किया अध्ययन
भारत में कैस्पियन कोबरा के सर्पदंश से हुई मौतों की पहली रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में हिमाचल के प्रसिद्ध चिकित्सक और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. ओमेश भारती सहित जयदीप मेनन, सैमसन जॉय, अर्चना फुल्ल, वीरेंद्र शर्मा और अनीता मल्होत्रा शामिल हैं। यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की सर्पदंश से जुड़ी रिसर्च परियोजना के दौरान सामने आया। शोध पत्र जुलाई 2026 में तैयार कर अंतरराष्ट्रीय जर्नल को भेजा गया और 18 अगस्त 2026 को इसे स्वीकार किया गया।
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हिमाचल में सर्पदंश से हर साल 100 से ज्यादा मौतों की चिंता
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सर्पदंश की समस्या खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गंभीर है। बरसात के दौरान खेतों और आसपास के क्षेत्रों में घास बढ़ने के कारण सांपों के साथ इंसानों का संपर्क बढ़ जाता है। डॉ. ओमेश भारती के अनुसार हिमाचल में हर साल औसतन 100 से अधिक लोगों की मौत सर्पदंश के कारण होने की बात सामने आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और समय पर अस्पताल नहीं पहुंचना स्थिति को और गंभीर बना देता है।
झाड़-फूंक में समय गंवाना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों ने लोगों को सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाने से बचने की सलाह दी है। डॉ. ओमेश भारती के मुताबिक सांप के काटने के बाद पीड़ित को घबराना नहीं चाहिए, लेकिन बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है। सर्पदंश के मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और उपयुक्त एंटी-स्नेक वेनम ही प्रमाणित उपचार का प्रमुख आधार है।
रिसर्च से इलाज की राह होगी आसान
कैस्पियन कोबरा से जुड़े इन मामलों ने हिमाचल में सर्पदंश की चुनौती को एक नया आयाम दिया है। भारत में इस प्रजाति के डंक से मौत की पहली रिपोर्ट सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को इस सांप के विष, उसके प्रभाव और उपचार की रणनीति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में इस तरह के अध्ययन सर्पदंश के उपचार के लिए बेहतर प्रोटोकॉल और मानक उपचार व्यवस्था (SOP) तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
