#विविध
September 13, 2026
हिमाचल HC में एंबुलेंस कर्मियों की जीत- 15 हजार वेतन देने के आदेश, PF अलग कटेगा
कंपनी और कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर चल रहा था विवाद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 नेशनल AMBULANCE सेवा से जुड़े चालकों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों EMT के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के वेतन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि टेक-होम सैलरी का मतलब कर्मचारी को वास्तव में मिलने वाली इन-हैंड राशि है। इसमें भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसी वैधानिक देनदारियों को शामिल करके निर्धारित वेतन को कम नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने पूर्ण चंद की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत के फैसले के बाद उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें निर्धारित 15 हजार रुपये की टेक-होम सैलरी के बजाय इससे काफी कम राशि हाथ में मिल रही थी।
मामले की सुनवाई के दौरान GVK इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से वेतन की गणना को लेकर अलग व्याख्या पेश की गई थी। कंपनी की ओर से 15 हजार रुपये की राशि को इस तरह माना गया कि इसी रकम में कर्मचारी से संबंधित PF, ESI और अन्य वैधानिक मदों को भी समायोजित किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कंपनी की इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि टेक-होम सैलरी वह रकम है, जो सभी आवश्यक वैधानिक कटौतियों और करों के बाद कर्मचारी को वास्तविक रूप से प्राप्त होती है। ऐसे में नियोक्ता की ओर से जमा किए जाने वाले PF और ESI जैसे अंशदान को कर्मचारी के खाते में आने वाली 15 हजार रुपये की राशि के भीतर समायोजित नहीं किया जा सकता।
अदालत के इस रुख का सीधा मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी के लिए 15 हजार रुपये की टेक-होम सैलरी निर्धारित की गई है- तो कंपनी केवल PF या ESI जैसी देनदारियों को उसी राशि से काटकर कर्मचारी को कम रकम नहीं दे सकती।
हाईकोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिया है कि पात्र कर्मचारियों को 20 जनवरी 2020 से 30 जनवरी 2021 तक निर्धारित 15 हजार रुपये प्रतिमाह की पूरी टेक-होम सैलरी का भुगतान किया जाए। आदेश के अनुसार यह व्यवस्था सक्षम प्राधिकारी की ओर से संबंधित विवाद का अंतिम निपटारा किए जाने तक लागू रहने की बात कही गई है।
अदालत ने कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान करने के लिए कंपनी को दो महीने का समय दिया है। इसका अर्थ है कि निर्धारित अवधि के दौरान कर्मचारियों को जो राशि कम मिली है, उसका हिसाब कर बकाया रकम का भुगतान अदालत के निर्देश के अनुसार करना होगा।
यह पूरा विवाद हाईकोर्ट के पहले के आदेश से जुड़ा हुआ है। 8 जनवरी 2020 को हाईकोर्ट ने GVK कंपनी को निर्देश दिया था कि विवाद के समाधान तक प्रत्येक पायलट और EMT का टेक-होम वेतन बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। इस आदेश को 20 जनवरी 2020 से प्रभावी किया जाना था।
इसके बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया को लेकर कंपनी और कर्मचारियों के बीच विवाद खड़ा हो गया। कर्मचारियों का आरोप था कि कंपनी ने अदालत द्वारा निर्धारित 15 हजार रुपये को वास्तविक इन-हैंड सैलरी मानने के बजाय इसे कंपनी की कुल लागत यानी 'कॉस्ट टू कंपनी' के रूप में लिया।
इस गणना में PF, ESI और ग्रेच्युटी जैसी मदों को भी शामिल कर दिया गया। इसके चलते कर्मचारियों को बैंक खाते में 15 हजार रुपये मिलने के बजाय करीब 11,545 रुपये से 12,908 रुपये तक की राशि ही प्राप्त हो रही थी।
कर्मचारियों ने इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताते हुए अदालत का रुख किया। उनकी मांग थी कि अदालत द्वारा निर्धारित 15 हजार रुपये की रकम उन्हें वास्तविक रूप से टेक-होम वेतन के रूप में मिलनी चाहिए और वैधानिक अंशदान को इस राशि से अलग रखा जाना चाहिए।
कर्मचारियों की ओर से पूर्ण चंद ने निष्पादन याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस याचिका में अदालत से अपने पूर्व आदेश को लागू करवाने और कर्मचारियों को निर्धारित वेतन का वास्तविक लाभ दिलाने की मांग की गई थी।
मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह सवाल प्रमुख रूप से सामने आया कि 'टेक-होम सैलरी' का वास्तविक अर्थ क्या है और क्या नियोक्ता PF तथा ESI जैसी वैधानिक देनदारियों को इसी रकम में शामिल कर सकता है।
हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की दलील को स्वीकार करते हुए कंपनी की ओर से अपनाई गई गणना को सही नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी के खाते में पहुंचने वाली वास्तविक रकम ही टेक-होम सैलरी के अर्थ में आती है। वैधानिक कटौतियों और नियोक्ता की जिम्मेदारियों को इसी राशि के भीतर समायोजित करके कर्मचारी की वास्तविक आय कम नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट के इस फैसले को 108 और 102 AMBULANCE सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में AMBULANCE सेवा के संचालन में चालक और EMT अहम भूमिका निभाते हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर रास्ते में आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तक इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी रहती है।
ऐसे में वेतन से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में अदालत का यह फैसला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। आदेश के अनुसार कंपनी को पात्र कर्मचारियों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अब कर्मचारियों की नजर कंपनी की ओर से अदालत के आदेश के अनुपालन और बकाया राशि के भुगतान पर है।