#विविध
September 15, 2026
बंदरों से परेशान हुआ असम- सरकार ने हिमाचल से लगाई मदद की गुहार..
हिमाचल मॉडल समझने आएगा असम के विधायकों का दल
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शिमला। असम के ग्रामीण इलाकों में बंदरों की बढ़ती संख्या अब किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। देखने में भले ही बंदर काफी आकर्षक और मासूम नजर आते हों, लेकिन कई गांवों में इनका बढ़ता उत्पात खेती-किसानी पर भारी पड़ रहा है।
बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। लगातार बढ़ रही इस समस्या को लेकर अब असम सरकार भी गंभीर नजर आ रही है।
BJP विधायक मृणाल सैकिया ने बंदरों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा हो रही स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर इस समस्या पर समय रहते प्रभावी तरीके से नियंत्रण नहीं पाया गया- तो आने वाले समय में इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। खेतों में फसलों को लगातार नुकसान पहुंचने से कृषि उत्पादन घटने की आशंका है।
बंदरों से जुड़ी समस्या अब गांवों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि असम विधानसभा में भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। विधायक मृणाल सैकिया के अनुसार, अलग-अलग मौकों पर सदन में बंदरों के कारण किसानों को हो रहे नुकसान और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती परेशानी को लेकर चिंता जाहिर की गई है।
ग्रामीणों की शिकायत है कि बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई जगहों पर किसान अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों के आसपास निगरानी रखने को मजबूर हैं। इससे किसानों का अतिरिक्त समय और मेहनत दोनों खर्च हो रहे हैं। समस्या बढ़ने के साथ ही अब ऐसे स्थायी उपाय की जरूरत महसूस की जा रही है, जिससे बंदरों को नियंत्रित करने के साथ-साथ किसानों की फसलों की भी सुरक्षा की जा सके।
बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए असम सरकार अब दूसरे राज्यों में अपनाए गए उपायों का अध्ययन करने की तैयारी में है। इसी क्रम में असम कैबिनेट ने एक अध्ययन दल को दूसरे राज्य के दौरे की मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य ऐसे मॉडल का अध्ययन करना है, जिसे स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक असम में भी लागू किया जा सके।
सरकार ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश के अनुभव को महत्वपूर्ण माना है। हिमाचल में भी अलग-अलग क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती समस्या ने लंबे समय तक किसानों और आम लोगों को परेशान किया है। वहां इस समस्या से निपटने के लिए समय-समय पर कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं।
असम सरकार की ओर से गठित अध्ययन दल हिमाचल प्रदेश का दौरा करेगा। इस टीम में सात विधायक शामिल होंगे। इनके साथ संबंधित विभागों के अधिकारी भी दौरे पर जाएंगे, ताकि समस्या के प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं को समझा जा सके।
दल हिमाचल में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए अपनाए गए विभिन्न उपायों की जानकारी जुटाएगा। इसमें बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने के प्रयास, किसानों की फसलों को बचाने के तरीके, प्रभावित इलाकों में प्रशासन की भूमिका और समस्या के दीर्घकालिक समाधान जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
असम और हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में हिमाचल में अपनाए गए किसी भी उपाय को उसी रूप में असम में लागू करना संभव नहीं होगा। अध्ययन दल हिमाचल के अनुभवों को समझने के बाद यह आकलन करेगा कि उनमें से कौन से उपाय असम के लिए कारगर हो सकते हैं।
इसके अलावा टीम संबंधित विभागों और विशेषज्ञों से भी जानकारी हासिल कर सकती है। इसका उद्देश्य ऐसी रणनीति तैयार करना होगा, जिससे बंदरों की समस्या को नियंत्रित किया जा सके और किसानों की फसलों को होने वाला नुकसान कम से कम हो।
हिमाचल प्रदेश के अध्ययन दौरे से लौटने के बाद सात विधायकों और अधिकारियों की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए अपनाए जा सकने वाले उपायों और संभावित रणनीति का उल्लेख किया जाएगा।
रिपोर्ट के आधार पर असम सरकार आगे की नीति तैयार कर सकती है। इसमें प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, फसलों की सुरक्षा, बंदरों की संख्या को नियंत्रित करने के उपाय और किसानों को राहत देने जैसे पहलुओं पर निर्णय लिया जा सकता है।
बंदरों के कारण फसलों को हो रहे नुकसान का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। यदि किसान अपनी तैयार फसल को सुरक्षित नहीं रख पाते हैं, तो उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती केवल बंदरों को नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि प्रभावित किसानों को राहत देने की भी है।
विधायक मृणाल सैकिया ने जिस तरह खाद्य संकट की आशंका जताई है। उससे साफ है कि सरकार इस समस्या को केवल स्थानीय परेशानी के तौर पर नहीं देखना चाहती। यदि बड़े स्तर पर फसलें प्रभावित होती हैं, तो इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।