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September 13, 2026
सीएम सुक्खू फिर जा रहे दिल्ली, हिमाचल के वित्तीय संकट को लेकर केंद्र के समक्ष उठाएंगे यह 3 मुद्दे
सीएम सुक्खू दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में उठाएंगे हिमाचल के मुद्दे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक बार फिर दिल्ली का रुख करने जा रहे हैं। आगामी 18 और 19 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल के वित्तीय हितों से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। सरकार की कोशिश रहेगी कि केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता में कमी और बंद हुई आर्थिक व्यवस्थाओं से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़े दबाव को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री के इस दिल्ली दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हिमाचल सरकार लंबे समय से राज्य की वित्तीय चुनौतियों को केंद्र के समक्ष उठाती रही है। इस बार भी सुक्खू नीति आयोग के मंच का इस्तेमाल हिमाचल के लिए अधिक वित्तीय सहयोग हासिल करने के लिए करेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि विभिन्न केंद्रीय वित्तीय व्यवस्थाओं में बदलाव और कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता के बंद होने से हिमाचल के खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। ऐसे में मुख्यमंत्री केंद्र के सामने प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों की जरूरतों को प्रमुखता से रखेंगे।
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सरकार ने नीति आयोग की बैठक के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अधिकारियों के स्तर पर बैठकें और प्रस्तुतिकरण की तैयारी का काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए प्रेजेंटेशन के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी है। इस बार भी मुख्यमंत्री खुद प्रदेश की ओर से मोर्चा संभालेंगे और केंद्र के सामने हिमाचल की आर्थिक जरूरतों का पक्ष रखेंगे।
नीति आयोग की बैठक में हिमाचल सरकार का फोकस मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दों पर रहने वाला है। सरकार इन मुद्दों के जरिए केंद्र से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त सहयोग की मांग करेगी।
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मुख्यमंत्री केंद्र के समक्ष राजस्व घाटा अनुदान का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। राज्य सरकार की मांग है कि बंद किए गए राजस्व घाटा अनुदान को दोबारा बहाल किया जाए या फिर इसकी भरपाई के लिए हिमाचल को विशेष केंद्रीय सहायता उपलब्ध करवाई जाए। सरकार का तर्क है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए इस प्रकार की वित्तीय सहायता बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अभाव में राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
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दूसरा बड़ा मुद्दा जीएसटी मुआवजे का है। राज्य सरकार केंद्र के समक्ष जीएसटी मुआवजा बंद होने से हिमाचल को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई का मुद्दा उठाएगी। सरकार के अनुसार मुआवजा व्यवस्था खत्म होने से प्रदेश को हर साल करीब 3 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री इस नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहयोग की मांग कर सकते हैं।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल के लिए घोषित 1500 करोड़ रुपये की धनराशि का मुद्दा भी मुख्यमंत्री नीति आयोग के मंच पर उठा सकते हैं। राज्य सरकार लगातार केंद्र से इस राशि को जल्द जारी करने की मांग करती रही है। ऐसे में दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री एक बार फिर केंद्र का ध्यान इस ओर आकर्षित करेंगे।
हिमाचल सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वित्तीय संसाधनों की कमी का सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों पर न पड़े। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य संस्थानों, शिक्षा और अन्य आधारभूत ढांचे पर खर्च अधिक आता है। ऐसे में सरकार चाहती है कि केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता और लंबित राशि को लेकर सकारात्मक फैसला हो, जिससे राज्य के विकास कार्यों की रफ्तार को बनाए रखा जा सके।
मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार इस बैठक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि हिमाचल की आर्थिक चुनौतियां केवल राज्य का नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्यों के विकास और वित्तीय स्थिरता से जुड़ा बड़ा मुद्दा हैं।
दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री के हिमाचल में भी कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। 16 सितंबर को मुख्यमंत्री ऊना के दौरे पर रहेंगे, जबकि 17 सितंबर को उनका नादौन जाने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ होते हुए दिल्ली पहुंचने की संभावना है। नीति आयोग की बैठक में शामिल होने वाले राज्य सरकार के अधिकारी भी 17 सितंबर को दिल्ली पहुंच जाएंगे। मुख्यमंत्री के साथ प्रधान सचिव देवेश कुमार और राज्य योजना सलाहकार रविंद्र कुमार सहित वित्त एवं योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे।
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अब सबकी नजरें 18 और 19 सितंबर को होने वाली नीति आयोग की बैठक पर रहेंगी। मुख्यमंत्री सुक्खू के सामने चुनौती केवल मांगें रखने की नहीं, बल्कि केंद्र से प्रदेश के लिए ठोस आर्थिक सहयोग हासिल करने की भी होगी। ऐसे में दिल्ली दौरे को हिमाचल की आर्थिक चुनौतियों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या केंद्र सरकार हिमाचल की वित्तीय मुश्किलों को कम करने के लिए राहत का रास्ता खोलेगी? क्या राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी मुआवजे जैसे मुद्दों पर कोई सकारात्मक पहल होगी? इन सवालों के जवाब नीति आयोग की बैठक के बाद सामने आएंगे।