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September 13, 2026
सुक्खू सरकार बिजली बिलों से भर रही खाली खजाना! सेस-शुल्क से 2151.46 करोड़ की हुई कमाई
बिजली बिल बने सरकार की कमाई का बड़ा जरिया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए प्रदेश की सुक्खू सरकार लगातार राजस्व बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रही है। सरकार की ओर से जहां खर्चों में कटौती और आय के नए स्रोत विकसित करने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता से विभिन्न करों और उपकरों के माध्यम से भी राजस्व जुटाया जा रहा है। इसी कड़ी में बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे अलग-अलग शुल्क और सेस सरकार के लिए बड़े राजस्व स्रोत बनकर सामने आए हैं।
विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि बिजली बिल केवल बिजली की खपत का भुगतान भर नहीं रह गए हैं। इनके माध्यम से सरकार को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, मिल्क सेस, एनवायरमेंट सेस, म्यूनिसिपैलिटी टैक्स समेत कई मदों में बड़ी रकम हासिल हो रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इन विभिन्न शुल्कों और उपकरों से कुल 2151.46 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।
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हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड की ओर से बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में शामिल विभिन्न शुल्कों और टैक्स की राशि संबंधित मदों में जमा की गई। सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से मिला है।
आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के तौर पर 1815.77 करोड़ रुपये जुटाए गए। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इससे 478.82 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी। अगले वर्ष यानी 2024-25 में यह राशि बढ़कर 601.53 करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से 545.10 करोड़ रुपये मिले, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई तक ही सरकार 190.32 करोड़ रुपये वसूल चुकी है।
सरकार की राजस्व बढ़ाने की कवायद में बिजली बिलों पर लगाए गए अन्य सेस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि मिल्क सेस के जरिए पिछले तीन वर्षों में 146.79 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
मिल्क सेस की वसूली में भी पिछले वित्तीय वर्ष में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। वर्ष 2024-25 में जहां इससे 14.02 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं 2025-26 में यह रकम बढ़कर 98.34 करोड़ रुपये पहुंच गई। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भी मिल्क सेस के रूप में 34.43 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं।
इसी तरह एनवायरमेंट सेस भी सरकार के खजाने में बड़ी रकम पहुंचा रहा है। पिछले तीन वर्षों में इससे 163.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अकेले 2025-26 में एनवायरमेंट सेस से 104.35 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई।
बिजली बिलों के जरिए सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और पर्यावरण या दूध सेस ही नहीं वसूले जा रहे हैं। आंकड़ों में म्यूनिसिपैलिटी टैक्स भी शामिल है। इसके माध्यम से कुल करीब 14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
वर्ष 2023-24 में म्यूनिसिपैलिटी टैक्स के रूप में 4.07 करोड़ रुपये, 2024-25 में 4.17 करोड़ रुपये और 2025-26 में 4.26 करोड़ रुपये वसूले गए। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक इस मद में 1.51 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं।
वहीं स्वच्छता सेस के माध्यम से भी राजस्व जुटाया जा रहा है। इस मद में तीन वर्षों में कुल 4.42 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। वर्ष 2025-26 में 3.34 करोड़ रुपये और अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 1.08 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।
सरकार की कमाई में बैंकिंग एवं फाइनेंस सेस और कमर्शियल सेस की हिस्सेदारी भी है। आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग एवं फाइनेंस सेस से 2.18 करोड़ रुपये, जबकि कमर्शियल सेस से 4.86 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। यानी बिजली बिलों में शामिल अलग-अलग मद भले ही उपभोक्ता के लिए छोटी रकम दिखाई दें, लेकिन प्रदेश स्तर पर करोड़ों उपभोक्ताओं के बिलों से जमा होने वाली यही राशि सरकार के लिए बड़ा राजस्व स्रोत बन रही है।
सरकार के आंकड़ों में राजस्व बढ़ने की तस्वीर भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्ष 2023-24 में विभिन्न शुल्कों और उपकरों से 482.89 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। इसके बाद वसूली का आंकड़ा लगातार बढ़ा और वर्ष 2025-26 में यह 756.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी राजस्व जुटाने की रफ्तार तेज बनी हुई है। अप्रैल से जुलाई 2026 तक सरकार इन मदों से 269.33 करोड़ रुपये की राशि एकत्रित कर चुकी है।
हिमाचल प्रदेश लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। राज्य पर बढ़ते कर्ज, कर्मचारियों-पेंशनरों से जुड़े वित्तीय दायित्व और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के खर्च के बीच सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में सुक्खू सरकार की ओर से टैक्स और सेस के जरिए सरकारी आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बिजली बिलों के माध्यम से हुई यह भारी वसूली भी इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा मानी जा सकती है। सरकार के लिए इससे निश्चित तौर पर अतिरिक्त राजस्व उपलब्ध हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल में अलग-अलग शुल्क जुड़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।