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September 13, 2026
श्रीनयना देवी मंदिर की रसोई में पहुंचे SDM : पुजारी ने जड़े आरोप, क्या सच में भंग हुई परंपरा...जानें
दिन में पांच बार माता के लिए भोग तैयार किया जाता है।
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्रीनयनादेवी मंदिर में माता की रसोई में प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के पुजारी अभिषेक शर्मा ने मंदिर न्यास के अध्यक्ष एवं SDM धर्मपाल के खिलाफ नयनादेवी पुलिस चौकी में शिकायत दी है।
पुजारी ने आरोप लगाया है कि SDM ने माता की रसोई में प्रवेश कर वहां तैयार किए जा रहे भोग से संबंधित बर्तनों को उठाया- जिससे रसोई की धार्मिक मर्यादा और वर्षों से चली आ रही परंपरा प्रभावित हुई।
पुजारी ने पुलिस से मामले की जांच करने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने के प्रयास के आरोप में कार्रवाई की मांग की है। वहीं, SDM धर्मपाल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
उनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने शिकायत दी है, उस समय उसकी मंदिर में ड्यूटी नहीं थी और वह मुख्य पुजारी भी नहीं था। SDM के अनुसार वह मौके पर निरीक्षण के लिए गए थे और उनकी ओर से किसी भी धार्मिक परंपरा का उल्लंघन नहीं किया गया।
पुलिस को दी गई शिकायत में पुजारी अभिषेक शर्मा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर के समय माता की रसोई में भोग तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान SDM धर्मपाल के रसोई में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उस समय माता की आरती के लिए भोग तैयार किया जा रहा था। आरोप है कि SDM ने वहां रखे भोग के बर्तनों को उठाया। पुजारी का कहना है कि माता की रसोई से जुड़ी धार्मिक प्रक्रियाओं में विशेष मर्यादा और नियमों का पालन किया जाता है। ऐसे में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश और भोग से संबंधित सामग्री को छूने को उन्होंने परंपरा के विपरीत बताया है।
पुजारी अभिषेक शर्मा का कहना है कि श्रीनयनादेवी मंदिर की माता की रसोई में भोग तैयार करने के लिए विशेष धार्मिक व्यवस्था निर्धारित है। उनके अनुसार यहां दिन में पांच बार माता के लिए भोग तैयार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि भोग बनाने के लिए बाकायदा रसोइया नियुक्त किया गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, रसोइया स्नान करने के बाद निर्धारित विधि का पालन करता है और धोती पहनकर रसोई में प्रवेश करता है। इसके बाद माता के लिए भोग तैयार किया जाता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस समय यह धार्मिक प्रक्रिया चल रही थी- उस दौरान SDM धर्मपाल पेंट-शर्ट में रसोई में पहुंचे। पुजारी ने इसे मंदिर की परंपरा और धार्मिक मर्यादा के विपरीत बताया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने SDM से रसोई में प्रवेश को लेकर सवाल किया तो अधिकारी की ओर से बताया गया कि वह निरीक्षण करने के लिए वहां पहुंचे थे। इसके बाद मामला विवाद में बदल गया और पुजारी ने पुलिस चौकी में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
पुजारी ने पुलिस से आग्रह किया है कि मामले की जांच गंभीरता से की जाए। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत में धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने के प्रयास का आरोप भी लगाया गया है।
मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और इस संबंध में आगामी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल, यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच है। एक तरफ मंदिर के पुजारी ने धार्मिक परंपरा और माता की रसोई की मर्यादा भंग होने का आरोप लगाया है। वहीं, दूसरी ओर SDM ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
SDM धर्मपाल ने पुजारी की शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की उस समय मंदिर में ड्यूटी नहीं थी और वह मुख्य पुजारी भी नहीं था। एसडीएम के अनुसार संबंधित व्यक्ति अनधिकृत रूप से वहां गया था और जब उसे रोका गया तो उसने बाद में इस तरह के आरोप लगाए।
SDM ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से मंदिर की किसी धार्मिक परंपरा को तोड़ने का सवाल ही नहीं है। उनका कहना है कि जिस समय की घटना को लेकर शिकायत की गई है, उस दौरान वह मंदिर परिसर में निरीक्षण के उद्देश्य से मौजूद थे।
श्रीनयनादेवी मंदिर से जुड़ा यह विवाद अब पुलिस शिकायत तक पहुंच गया है। चूंकि शिकायत में धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़े आरोप लगाए गए हैं और SDM की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।