शिमला। हिमाचल प्रदेश के उन लाखों उपभोक्ताओं को इस महीने बड़ा झटका लगने वाला है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरकारी राशन डिपुओं से सस्ता राशन प्राप्त करते हैं। इस बार डिपुओं में जहां सरसों का तेल पहले के मुकाबले महंगा मिलने वाला है, वहीं चीनी और मलका दाल की उपलब्धता को लेकर भी निराशाजनक स्थिति बनी हुई है। ऐसे में राशन पर निर्भर परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
सरसों के तेल के लिए चुकाने होंगे ज्यादा पैसे
प्रदेश के सरकारी राशन डिपुओं में इस महीने सरसों का तेल पिछले महीने की तुलना में अधिक कीमत पर उपलब्ध होगा। उपभोक्ताओं को अब एक लीटर सरसों तेल के लिए 160 रुपये चुकाने होंगे। पिछले महीने यही तेल 153 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था। यानी इस बार तेल की कीमत में 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला : अब नहीं झुकेंगे स्कूली बच्चों के कंधे, नए नियमों के साथ निर्देश जारी
हालांकि खुले बाजार में सरसों तेल की कीमतें अभी भी काफी अधिक बनी हुई हैं। बाजार में यही तेल 220 से 230 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। ऐसे में डिपुओं के माध्यम से मिलने वाला तेल अभी भी उपभोक्ताओं को कुछ राहत देता नजर आ रहा है, लेकिन कीमत बढ़ने से राशन लेने वाले परिवारों का खर्च जरूर बढ़ेगा।
चीनी का इंतजार बढ़ा
सरकारी डिपुओं से राशन लेने वाले परिवारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी चीनी की अनुपलब्धता बनी हुई है। लगातार दूसरे महीने भी प्रदेश के अधिकांश डिपुओं में चीनी की आपूर्ति नहीं हो पाई है। इस महीने भी चीनी मिलने की कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बन पाई है। चीनी की सप्लाई बाधित रहने से हजारों परिवारों को बाजार से महंगे दामों पर चीनी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और सीमित आय वाले परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
यह भी पढ़ें : केरल आपदा में हिमाचल के दूसरे इंजीनियर की मौ*त : 6 दिन बाद मिली देह, कल होगा संस्कार
मलका दाल भी नहीं पहुंचेगी डिपुओं तक
चीनी के साथ-साथ मलका दाल की आपूर्ति भी इस बार प्रभावित रही है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई डिपुओं तक मलका दाल नहीं पहुंच पाई है। इससे उपभोक्ताओं को एक और जरूरी खाद्य वस्तु से वंचित रहना पड़ेगा। दालों की कीमतें पहले से ही बाजार में ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में डिपो के माध्यम से मिलने वाली दाल की अनुपलब्धता आम परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
रिफाइंड तेल की सप्लाई भी प्रभावित
इस महीने रिफाइंड तेल की आपूर्ति भी डिपुओं में नहीं हो पाई है। खाद्य सामग्री की अनियमित उपलब्धता के कारण उपभोक्ताओं को हर महीने किसी न किसी आवश्यक वस्तु के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि पिछले कुछ समय से प्रभावित चल रही सरसों तेल की सप्लाई इस बार बहाल हुई है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने राहत को कुछ हद तक कम कर दिया है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में नया नियम : अब ग्रामीणों को भी देना होगा कचरा TAX, हर महीना वसूल होंगे 3 हजार
एक साथ राशन नहीं मिलने से बढ़ रही परेशानी
डिपो संचालकों का कहना है कि लंबे समय से सरकार और संबंधित विभागों से सभी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की एक साथ आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। कभी दाल की कमी सामने आती है तो कभी चीनी की, जबकि कई बार तेल की सप्लाई भी प्रभावित रहती है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें राशन लेने के लिए बार-बार डिपो के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की बढ़ी मुश्किल
खाद्य सामग्री की अनियमित आपूर्ति से सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हो रही है। एक ही महीने में कई बार डिपो पहुंचना उनके लिए चुनौती बन जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि सभी जरूरी राशन सामग्री एक साथ उपलब्ध करवाई जाए तो लोगों का समय और पैसा दोनों बच सकता है। वहीं डिपो संचालकों का भी मानना है कि नियमित और व्यवस्थित आपूर्ति व्यवस्था ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में पंचायतों की लगेगी लॉटरी : बेहतर काम पर मिलेगा दोगुना पैसा, केंद्र ने बढ़ाई ग्रांट
लाखों राशन कार्ड धारकों पर पड़ेगा असर
प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार अपनी मासिक जरूरतों के लिए सरकारी डिपुओं पर निर्भर हैं। ऐसे में सरसों तेल की बढ़ी कीमत, चीनी की अनुपलब्धता और मलका दाल की कमी का असर सीधे लाखों राशन कार्ड धारकों पर पड़ने वाला है। आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की निगाहें अब इस बात पर टिकी रहेंगी कि विभाग इन जरूरी खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति कब तक सामान्य कर पाता है।
