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July 12, 2026

सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला : अब नहीं झुकेंगे स्कूली बच्चों के कंधे, नए नियमों के साथ निर्देश जारी

अतिरिक्त सामान लाने पर भी रहेगी नजर

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Sukhu Government School Bag

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों के बढ़ते बस्ते के बोझ को कम करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने सरकारी और निजी स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनावश्यक शैक्षणिक दबाव से राहत देना और उनके शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सभी स्कूलों को जारी हुए निर्देश

जिला शिमला के उप निदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं मुख्याध्यापकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने कहा है कि विद्यार्थियों के भारी स्कूल बैग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप यह कदम उठाया गया है।

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शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अपनी दैनिक समय-सारिणी इस प्रकार तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे विद्यार्थियों को केवल उसी दिन पढ़ाई जाने वाली विषयों की पुस्तकें और कॉपियां ही साथ लानी पड़ें। इससे बच्चों को रोजाना अनावश्यक किताबें ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्कूल बैग का वजन स्वतः कम हो जाएगा।

अतिरिक्त सामान लाने पर भी रहेगी नजर

विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि छात्र अपने बैग में जरूरत से ज्यादा पुस्तकें, कॉपियां या अन्य अनावश्यक सामग्री लेकर न आएं। स्कूल प्रशासन को इस संबंध में नियमित निगरानी रखने और विद्यार्थियों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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शिक्षा विभाग ने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा स्कूल बैग के वजन को लेकर जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। इन मानकों को विद्यालयों की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी छात्रों को समान और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

विभाग ने मांगी अनुपालन रिपोर्ट

सरकारी और निजी दोनों तरह के विद्यालयों को इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। साथ ही, प्रत्येक विद्यालय को आदेशों के पालन में की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट यानी ATR निर्धारित प्रारूप में तय समय के भीतर शिक्षा विभाग को भेजनी होगी। विभाग इन रिपोर्टों के आधार पर स्कूलों में नियमों के पालन की समीक्षा करेगा।

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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो विद्यार्थियों को कम उम्र में होने वाली पीठ, गर्दन और कंधों की समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलेगी। साथ ही पढ़ाई का माहौल भी अधिक व्यवस्थित और छात्र-केंद्रित बन सकेगा।

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