#हादसा
July 12, 2026
केरल आपदा में हिमाचल के दूसरे इंजीनियर की मौ*त : 6 दिन बाद मिली देह, कल होगा संस्कार
पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है
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कांगड़ा। केरल के वायनाड में आई प्राकृतिक आपदा ने हिमाचल प्रदेश के एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया। जिला कांगड़ा की फतेहपुर तहसील के ग्राम पंचायत टकोली घिरथा निवासी 50 वर्षीय विक्रम अब इस दुनिया में नहीं रहे।
कई दिनों तक चले राहत एवं खोज अभियान के बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे उनका शव बरामद किया गया। इस सूचना के सामने आते ही परिवार की वह आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई, जिसके सहारे सभी उनके सुरक्षित लौटने का इंतजार कर रहे थे। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, विक्रम एक निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी DBL में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। कंपनी की परियोजना के तहत उनकी ड्यूटी केरल के वायनाड क्षेत्र में लगी हुई थी।
7 जुलाई की सुबह करीब 11:09 बजे के बाद अचानक उनका परिवार से संपर्क टूट गया। मोबाइल फोन बंद आने लगा और काफी प्रयासों के बावजूद उनसे कोई बात नहीं हो सकी। इसके बाद परिवार की चिंता लगातार बढ़ती चली गई।
जैसे ही विक्रम के लापता होने की जानकारी मिली, उनके भाई कुलवंत सिंह और प्रमोद राणा बिना समय गंवाए 8 जुलाई को वायनाड के लिए रवाना हो गए। वहां पहुंचकर उन्होंने स्थानीय प्रशासन, राहत एजेंसियों और अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। हर दिन चल रहे खोज अभियान से परिवार को उम्मीद थी कि शायद कोई अच्छी खबर मिलेगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
कई दिनों तक मलबे और प्रभावित क्षेत्रों में चले सर्च ऑपरेशन के बाद रविवार को राहत दल ने विक्रम का शव बरामद कर लिया। इस खबर के बाद परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिन आंखों में छह दिनों से अपने बेटे, भाई और परिवार के सदस्य को फिर से देखने की उम्मीद थी, वे पल भर में नम हो गईं।
परिजनों ने बताया कि विक्रम के लापता होने के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था। किसी का मन खाने-पीने में नहीं लग रहा था। पिछले छह दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला और परिवार का हर सदस्य भगवान से उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना करता रहा। रिश्तेदार, पड़ोसी और गांव के लोग भी लगातार परिवार को ढांढस बंधा रहे थे और राहत अभियान की हर छोटी-बड़ी जानकारी पर नजर बनाए हुए थे।
वर्तमान में विक्रम के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसके बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर सोमवार तक उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव टकोली घिरथा लाए जाने की संभावना है। गांव में अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विक्रम के निधन की खबर फैलते ही टकोली घिरथा पंचायत ही नहीं बल्कि पूरे फतेहपुर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें मेहनती, सरल स्वभाव और अपने काम के प्रति समर्पित व्यक्ति बताया।