कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की सबसे कठिन यात्राओं में शामिल श्रीखंड महादेव यात्रा के आयोजन को लेकर इस वर्ष अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। यात्रा मार्ग की मौजूदा परिस्थितियों और विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत सुरक्षा रिपोर्ट ने प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की चिंता बढ़ा दी है।
हाई रिस्क पर श्रीखंड के कई क्षेत्र
हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा के आयोजन पर पुनर्विचार किया जा रहा है। इस संबंध में श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू अनुराग चन्द्र शर्मा ने की।
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टल सकती है यात्रा
बैठक में ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी सदस्यों ने भाग लिया और आगामी यात्रा के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक का मुख्य विषय यात्रा मार्ग की सुरक्षा और विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट रहा।
विशेषज्ञों की टीम ने किया निरीक्षण
यात्रा मार्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग, वन विभाग तथा अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान, मनाली के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम ने अलग-अलग चरणों में यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी।
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रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रिपोर्ट में विशेष रूप से भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के हिस्से को अत्यधिक संवेदनशील और जोखिमपूर्ण बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में कई स्थानों पर ढलानें अत्यधिक खड़ी हैं, मिट्टी और चट्टानें अस्थिर स्थिति में हैं तथा रास्ते काफी संकरे और फिसलन भरे हैं। इसके अलावा मार्ग में कई ऐसे नाले और जलधाराएं हैं जिन्हें पार करना श्रद्धालुओं के लिए जोखिमभरा हो सकता है।
मानसून के दौरान बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद इस क्षेत्र में खतरा और अधिक बढ़ सकता है। लगातार बारिश की स्थिति में भूस्खलन, चट्टानों के गिरने, अचानक जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड और मलबा बहने जैसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। यदि मौसम प्रतिकूल हुआ तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
वैकल्पिक मार्ग भी नहीं माना गया सुरक्षित
विशेषज्ञों ने केवल मौजूदा मार्ग ही नहीं बल्कि प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग का भी अध्ययन किया। रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि वैकल्पिक रास्ता भी वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जिस क्षेत्र से होकर यात्रा गुजरती है, वहां की भौगोलिक संरचना काफी जटिल है। कई स्थानों पर जमीन ढीली है और पत्थरों के खिसकने का खतरा बना रहता है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य करना भी बेहद कठिन हो सकता है।
भीमद्वारी कैंप क्षेत्र को बताया हाई रिस्क जोन
रिपोर्ट में भीमद्वारी कैंपिंग क्षेत्र को भी उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां फ्लैश फ्लड का खतरा बना रहता है। यदि अचानक मौसम खराब होता है तो बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्र में अस्थायी पुल, रस्सी मार्ग या अन्य अस्थायी ढांचों का निर्माण भी व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता। इसी कारण विशेषज्ञों ने इस पूरे हिस्से को ‘हाई रिस्क जोन’ घोषित करने की सिफारिश की है।
सुरक्षा से नहीं होगा समझौता
बैठक के दौरान उपायुक्त कुल्लू ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन और यात्रा ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा का आयोजन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
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उन्होंने ट्रस्ट सदस्यों से रिपोर्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव लिखित रूप में देने का आग्रह किया है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम निर्णय सभी पहलुओं के विस्तृत परीक्षण और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही लिया जाएगा।
भू-वैज्ञानिक अध्ययन की भी सिफारिश
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के क्षेत्र का विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। इसके लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण या किसी अन्य विशेषज्ञ संस्था की सेवाएं ली जा सकती हैं। ऐसे अध्ययन से क्षेत्र की वास्तविक भूगर्भीय स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव होगा और भविष्य में यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी समाधान तलाशे जा सकेंगे।
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आस्था और चुनौती का संगम है श्रीखंड यात्रा
श्रीखंड महादेव यात्रा हिमाचल प्रदेश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र से शुरू होने वाली यह यात्रा लगभग 32 किलोमीटर लंबे दुर्गम पर्वतीय मार्ग से होकर गुजरती है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ऊंचे पहाड़, बर्फीले हिस्से, ग्लेशियर और खतरनाक चढ़ाइयों का सामना करना पड़ता है।
19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित
करीब 19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था इस यात्रा को विशेष महत्व प्रदान करती है।
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रिपोर्ट से उठे कई सवाल
हालांकि इस बार सुरक्षा रिपोर्ट ने यात्रा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो श्रद्धालुओं की सुरक्षा और विशेषज्ञों की सिफारिशों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
