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August 6, 2026

कसोल रेव पार्टी केस : हाईकोर्ट के आदेश पर सुक्खू सरकार का बड़ा एक्शन- बदल डाले DC-SP

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा दबाव

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Kasol Rave Party

शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कसोल रेव पार्टी मामले में आखिरकार प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट से सीमित राहत मिलने के बाद राज्य सरकार ने कुल्लू के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया है। यह कार्रवाई उस मामले से जुड़ी है जिसमें आरोप लगाए गए थे कि जिले में आयोजित रेव पार्टी के दौरान प्रशासन और पुलिस ने अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा दबाव

दरअसल, यह पूरा मामला जून 2026 में कसोल क्षेत्र में आयोजित एक रेव पार्टी से जुड़ा है। बताया गया था कि 4 से 11 जून के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। बाद में इस आयोजन के वीडियो और अन्य जानकारियां सामने आने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा।

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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिपोर्टों और रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत का मानना था कि संभावित कानून-व्यवस्था और मादक पदार्थों से जुड़े जोखिमों के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के तबादले के साथ-साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए थे।

सरकार द्वारा जारी आदेश

सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, कुल्लू के पुलिस अधीक्षक मदन कौशल को उनके पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय शिमला में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जगह आईपीएस अधिकारी अभिषेक एस को कुल्लू का नया एसपी नियुक्त किया गया है।

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अभिषेक एस इससे पहले पुलिस मुख्यालय में एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) के साथ-साथ साइबर क्राइम विंग का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रहे थे। वहीं कुल्लू के उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा का भी तबादला कर दिया गया है। नए उपायुक्त की नियुक्ति होने तक कुल्लू के एसडीएम को जिला प्रशासन का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।

सुप्रीम कोर्ट से मिली आंशिक राहत

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, लेकिन तबादले के निर्देशों में कोई राहत नहीं दी। इसके बाद सरकार को न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए प्रशासनिक फेरबदल करना पड़ा। कसोल रेव पार्टी मामला अभी भी न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है।

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संबंधित घटनाक्रम की जांच जारी है और भविष्य में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अधिकारियों के तबादले को अदालत के निर्देशों के अनुपालन के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला हिमाचल प्रदेश में बड़े आयोजनों की अनुमति, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस प्रकरण पर न्यायालय की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी।

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