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August 5, 2026

हिमाचल HC का बड़ा फैसला : भर्ती के बीच शादी करने पर नहीं जाएगी नौकरी, आरक्षण भी मिलेगा

30 दिसंबर 2023 की स्थिति से तय होगी पात्रता

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Himachal High Court

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थियों के रोजगार और आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला भर्ती के लिए आवेदन करने के बाद विवाह करती है, तो केवल शादी हो जाने के आधार पर उसकी पात्रता, आरक्षण से जुड़े अंक या नियुक्ति का अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थी की पात्रता का निर्धारण भर्ती विज्ञापन में तय आवेदन की अंतिम तारीख के आधार पर किया जाना चाहिए।

नीतू कुमारी को मिली बड़ी राहत

दरअसल, यह मामला मंडी जिले के द्रंग बीट में वन मित्र भर्ती से जुड़ा है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता नीतू कुमारी के मामले में विभाग की कार्रवाई को सही नहीं माना। नीतू कुमारी ने आवेदन की अंतिम तारीख तक निर्धारित पात्रता पूरी की थी और चयन प्रक्रिया में भी बेहतर प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई।

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हाईकोर्ट ने विभाग को नीतू कुमारी को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। उनकी नियुक्ति की प्रभावी तारीख 15 मार्च 2025 मानी जाएगी। इसके साथ उन्हें वेतन, वरिष्ठता और अन्य परिणामी लाभ भी देने होंगे। हालांकि, कोर्ट ने पहले से नियुक्त दूसरे अभ्यर्थी की सेवा को प्रभावित नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

30 दिसंबर 2023 की स्थिति से तय होगी पात्रता

इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 दिसंबर 2023 थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, उस समय वह BPL परिवार से संबंधित थीं और अपने मायके की ग्राम पंचायत की निवासी थीं। उन्होंने शारीरिक दक्षता परीक्षा पास की और दस्तावेज सत्यापन के लिए द्रंग बीट में प्रथम स्थान पर बुलाया गया।

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लेकिन मार्च 2024 में विवाह के बाद विभाग ने उनके BPL अंक हटा दिए। विभाग का आधार था कि विवाह के बाद उनके ससुराल का परिवार BPL श्रेणी में नहीं है और वह संबंधित ग्राम पंचायत की निवासी भी नहीं रहीं। इसके बाद उनकी जगह दूसरे अभ्यर्थी को नियुक्त कर दिया गया।

भर्ती में देरी का खामियाजा उम्मीदवार क्यों भुगते?

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का नुकसान अभ्यर्थी को नहीं दिया जा सकता। दस्तावेज सत्यापन का उद्देश्य यह जांचना है कि आवेदन की अंतिम तारीख तक जमा किए गए प्रमाणपत्र सही और वैध हैं या नहीं।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी उम्मीदवार ने कटऑफ डेट पर सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर ली थीं, तो बाद में उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों में हुए बदलाव के आधार पर उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

चयन प्रक्रिया के दौरान शादी से रोकने वाला कोई कानून नहीं

कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी महिला अभ्यर्थी को नौकरी की चयन प्रक्रिया पूरी होने तक विवाह करने से रोकता हो। इसलिए केवल शादी के कारण BPL या ग्राम पंचायत से जुड़ी स्थिति बदलने को नियुक्ति से इनकार का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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हाईकोर्ट ने अपने पूर्व फैसलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए भी कहा कि पात्रता सामान्यतः विज्ञापन में निर्धारित अंतिम तारीख के आधार पर तय होनी चाहिए। इस फैसले को महिला अभ्यर्थियों के रोजगार अधिकारों और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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