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August 9, 2026

शिव भक्तों को बड़ा झटका- महंगी होगी मणिमहेश यात्रा, ढीली करनी पड़ेगी जेब

प्रशासन की मंजूरी के बाद ही लागू होंगी नई दरें

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Manimahesh Yatra Chamba

चंबा। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की जेब इस बार कुछ ज्यादा ढीली हो सकती है। भारी बारिश, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा के कारण हड़सर से मणिमहेश तक पुराने पैदल मार्ग के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासन को कई स्थानों पर वैकल्पिक रास्ते तैयार करने पड़े हैं। इन बदले हुए रास्तों का सीधा असर घोड़े और खच्चर संचालकों के संचालन पर पड़ा है।

आपदा से कई जगह क्षतिग्रस्त हुआ रास्ता

दरअसल, वैकल्पिक मार्गों के कारण घोड़ों और खच्चरों को पहले की तुलना में ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। इसी को देखते हुए घोड़ा संचालकों ने यात्रा के दौरान निर्धारित किराये में 700 से 900 रुपये तक की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन के समक्ष रखा है। हालांकि, यह बढ़ोतरी अभी अंतिम नहीं है। नई दरें तभी लागू होंगी, जब जिला प्रशासन की ओर से उन्हें आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी।

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हड़सर से मणिमहेश जाने वाला यात्रा मार्ग इस बार मौसम की मार से प्रभावित हुआ है। तोस का गोठ, दौनाली और सुंदररासी ग्लेशियर प्वाइंट समेत कई स्थानों पर भारी बारिश और भूस्खलन के कारण रास्ते को नुकसान पहुंचा है। कुछ हिस्सों में मलबा आने और मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन नए रास्तों की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हैं। कई जगह चढ़ाई अधिक है और रास्ता लंबा होने के कारण घोड़ों तथा खच्चरों को अतिरिक्त समय और मेहनत करनी पड़ रही है।

प्रशासन की मंजूरी के बाद ही लागू होंगी नई दरें

घोड़ा संचालकों का तर्क है कि नए मार्ग के कारण केवल दूरी ही नहीं बढ़ी, बल्कि संचालन का खर्च और जोखिम भी बढ़ गया है। घोड़ों को अधिक समय तक रास्ते में रखना पड़ रहा है। दुर्गम इलाकों में आवाजाही के कारण पशुओं की देखभाल और उनके संचालन में भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। इसी आधार पर संचालकों ने प्रशासन से मौजूदा किराये की समीक्षा करने और परिस्थितियों के अनुरूप नई दरें निर्धारित करने की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार श्रद्धालुओं को घोड़े की सवारी के लिए 700 से 900 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

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एडीसी भरमौर विकास शर्मा के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में घोड़ा-खच्चर संचालन की लागत बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, किराये में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, इसका फैसला प्रशासनिक स्तर पर विचार के बाद किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मणिमहेश यात्रा में सामान और लकड़ी की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले घोड़ों का किराया भी बढ़ सकता है। पिछले वर्ष जहां लकड़ी ढुलाई का किराया करीब 2,800 रुपये था, वहीं इस वर्ष यह लगभग 3,600 रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

श्रद्धालुओं को अंतिम किराये का इंतजार

मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हड़सर से आगे का कठिन सफर घोड़े या खच्चर के माध्यम से पूरा करते हैं। ऐसे में किराये में प्रस्तावित बढ़ोतरी का सीधा असर यात्रियों के यात्रा बजट पर पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि श्रद्धालुओं से घोड़े की सवारी के लिए कितना किराया लिया जाएगा।
प्रशासन के सामने एक ओर आपदा से प्रभावित मार्गों में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ को नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी भी है।

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