मंडी। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। बीती रात से हो रही भारी बारिश ने राज्य के कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खासकर मंडी जिले की सराज घाटी के थुनाग क्षेत्र में अचानक हुए भूस्खलन और मलबा गिरने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। सराज में एक बार फिर देजी खड्ड उफान है। 

आज सराज में फिर मची तबाही

सराज की लगभग सभी सड़कें बंद है। PWD की महीने भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। अस्थाई कलवर्ट भी बाखली खड्ड बहा ले गई है। पर्यटन नगरी जंजैहली शेष विश्व से कट चुकी है। वहीं थुनाग के  स्कूलों में आज अवकाश घोषित कर दिया है। 

 

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सड़कों पर मलबा और कीचड़ फैल गया है, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। वहीं ब्यास और सतलुज नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

थुनाग में भूस्खलन, कई गांवों से संपर्क टूटा

मंडी जिले की सराज घाटी में थुनाग के पास रविवार देर रात भूस्खलन की बड़ी घटना हुई। भारी बारिश के चलते एक पहाड़ी दरक गई, जिससे मलबा सड़क पर आ गया और कई कच्चे-पक्के रास्ते बंद हो गए। प्रशासन ने JCB और राहत दलों को मौके पर भेजा है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। बताया जा रहा है कि थुनाग से जुड़ने वाले दर्जनों छोटे गांवों की सड़कें पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुकी हैं।

 

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मनाली में स्कूलों की छुट्टी, ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ा

कुल्लू जिला के मनाली क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण सोमवार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों तथा आईटीआई संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। एसडीएम मनाली ने यह निर्णय क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए लिया है। ब्यास नदी का जलस्तर भी खतरनाक स्तर के करीब पहुंच चुका है। मनाली-बजौरा मार्ग पर जगह-जगह पानी भर गया है, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई है।

घनी धुंध से बिगड़ी विजिबिलिटी

राजधानी शिमला और ढली से फागू के बीच सोमवार सुबह घनी धुंध छाई रही, जिससे विजिबिलिटी 20 मीटर से भी नीचे चली गई। इस मार्ग पर वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। शिमला शहर में कई जगह पेड़ गिरने और बिजली की तारों के टूटने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट

मौसम विभाग ने हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में सोमवार शाम तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। विभाग ने विशेषकर नदी किनारे बसे गांवों को सतर्क रहने को कहा है। स्थानीय प्रशासन ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में लोगों से बाहर न निकलने की अपील की है।

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जलवायु परिवर्तन या इंसानी लापरवाही?

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल में इस तरह की लगातार आपदाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ अनियोजित निर्माण, अवैध कटान और नदी तटों पर कचरा डालने जैसी लापरवाहियां भी बड़ी वजह हैं। सराज घाटी में हुए ताजा भूस्खलन स्थल की जांच के लिए जियोलॉजिकल टीम को भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही हिमालयी राज्यों में अनियंत्रित विकास पर चिंता जता चुका है।

प्रशासन अलर्ट पर, पर तैयारियों पर उठ रहे सवाल

हालांकि प्रशासन दावा कर रहा है कि सभी टीमें अलर्ट पर हैं, लेकिन स्थानीय लोग तैयारियों पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहले से चेतावनी नहीं दी गई थी और राहत पहुंचने में भी देर हुई।

 

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क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

थुनाग के एक निवासी ने बताया कि रात को तेज आवाज आई, बाहर निकले तो देखा पूरा पहाड़ गिर गया। सड़क का नामोनिशान नहीं रहा। कई घरों के आसपास मलबा पहुंच गया है, लेकिन प्रशासन सुबह तक नहीं पहुंचा।

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