शिमला। हिमाचल प्रदेश में भाजपा के एक विधायक की कंपनी को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने बड़ा झटका दिया है। राजधानी शिमला के अपर मल्याणा स्थित वर्मा अपार्टमेंट्स में कवर्ड पार्किंग को लेकर चल रहे विवाद पर रेरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए चौपाल के भाजपा विधायक बलबीर सिंह वर्मा की कंस्ट्रक्शन कंपनी पर कुल 6 लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।
इतना ही नहीं, प्राधिकरण ने कंपनी को 60 दिन के भीतर तीनों आवंटियों को स्वीकृत नक्शे और विक्रय समझौते के मुताबिक कवर्ड पार्किंग उपलब्ध करवाने के आदेश भी दिए हैं। राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे इस मामले में एक जनप्रतिनिधि की कंपनी पर नियामक कार्रवाई ने रियल एस्टेट कारोबार में जवाबदेही और उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा विधायक की कंपनी को रेरा का झटका
अपर मल्याणा के वर्मा अपार्टमेंट्स से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में रेरा ने यह फैसला सुनाया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष आरडी धीमान और सदस्य विदुर मेहता की पीठ ने मंगलवार को आवंटियों की शिकायतों पर सुनवाई के बाद कंपनी के खिलाफ आदेश जारी किए। तीनों मामलों में कंपनी पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस तरह कुल जुर्माने की राशि छह लाख रुपये हो गई है। रेरा ने स्पष्ट किया है कि आवंटियों को समझौते के अनुरूप कवर्ड पार्किंग उपलब्ध करवाना कंपनी की जिम्मेदारी है।
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पांच-पांच लाख देकर बुक किए थे तीन बीएचके फ्लैट
इस पूरे विवाद की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। वैभव गुप्ता, संजय कुमार और उमेश वालिया ने वर्मा अपार्टमेंट्स में 1200 वर्ग फीट के तीन बीएचके फ्लैट बुक करवाए थे। इसके लिए तीनों आवंटियों ने पांच-पांच लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में जमा करवाए थे। आवंटियों का आरोप था कि फ्लैट की बुकिंग और विक्रय समझौते के दौरान उन्हें भवन के भीतर स्वीकृत नक्शे के अनुसार कवर्ड पार्किंग देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें भवन के बाहर सेटबैक क्षेत्र में पार्किंग उपलब्ध करवाई गई।
पार्किंग पर शेड हटने के बाद बढ़ा विवाद
आवंटियों के अनुसार, पार्किंग स्लॉट के ऊपर सीजीआई शीट की छत बनाई गई थी, लेकिन बाद में इस शेड को भी हटा दिया गया। इसके चलते पार्किंग को लेकर विवाद और गहरा गया। आवंटियों ने इस मामले को रेरा के समक्ष उठाया और समझौते के अनुसार पार्किंग उपलब्ध करवाने की मांग की। उनका पक्ष था कि जब फ्लैट खरीदने के दौरान कवर्ड पार्किंग का प्रावधान किया गया था तो कंपनी को उसी के मुताबिक सुविधा देनी चाहिए।
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कंपनी की दलील नहीं आई काम
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2025 में हुआ समझौता अंतिम है और सक्षम प्राधिकारी की आपत्ति के बाद सेटबैक क्षेत्र में बनाए गए शेड को हटाया गया था। कंपनी का कहना था कि पार्किंग की व्यवस्था आवंटियों के आग्रह पर ही की गई थी। हालांकि, रेरा ने विक्रय समझौतों और स्वीकृत भवन नक्शे में दर्ज प्रावधानों को महत्वपूर्ण माना। प्राधिकरण ने साफ किया कि समझौते में भवन के भीतर कवर्ड पार्किंग देने की बात शामिल थी, इसलिए कंपनी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
60 दिन का अल्टीमेटम, जुर्माना भी इसी अवधि में जमा करना होगा
रेरा ने कंपनी को दोहरी जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश के मुताबिक, कंपनी को 60 दिनों के भीतर तीनों आवंटियों को स्वीकृत नक्शे के अनुसार कवर्ड पार्किंग उपलब्ध करवानी होगी। इसके अलावा छह लाख रुपये का जुर्माना भी इसी अवधि में रेरा फंड में जमा करवाना होगा। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 63 के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
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विधायक बलबीर वर्मा बोले- रेरा के फैसले को देंगे चुनौती
वहीं, इस मामले में विधायक बलबीर सिंह वर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि तीनों आवंटियों के आग्रह पर ही अपार्टमेंट के बाहर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की ओर से कवर्ड पार्किंग पर आपत्ति जताई गई थी, जिसके बाद सेटबैक क्षेत्र में बने शेड हटाए गए। विधायक ने रेरा के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी इस आदेश को सक्षम अदालत में चुनौती देगी। ऐसे में अब इस मामले में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ने के आसार हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा
भाजपा विधायक की कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ रेरा की इस कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। एक ओर प्राधिकरण ने फ्लैट खरीदारों के अधिकारों और विक्रय समझौते की शर्तों को प्राथमिकता देते हुए कंपनी पर जुर्माना लगाया है, वहीं दूसरी ओर विधायक ने फैसले को अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी निर्धारित 60 दिनों के भीतर रेरा के आदेश का पालन करती है या फिर मामला अदालत पहुंचने के बाद नया कानूनी मोड़ लेता है। फिलहाल, इस फैसले ने शिमला के रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों की जवाबदेही और फ्लैट खरीदारों को मिलने वाली सुविधाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
