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November 4, 2026
CM सुक्खू ने घर पहुंचकर परिवार से जताया दुख

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सातवें राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन और रामपुर से चार बार विधायक रहे नंदलाल बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बेटे आशीष ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बुधवार को नंदलाल के घर पहुंचे और उनके परिजनों से मिलकर दुख जताया। सुबह 11 बजे तक नंदलाल की पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए घर पर रखा गया था। मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई।
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इस दौरान सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से अपने नेता को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री, PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी समेत कई नेता और अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि नंदलाल का निधन कांग्रेस पार्टी और पूरे प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है।

नंदलाल का मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में निधन हो गया था। वह 72 साल के थे और काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से रामपुर समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। नंदलाल अपने पीछे पत्नी, बेटा-बहू और सात साल के पोते को छोड़ गए हैं। उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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राजनीति में आने से पहले नंदलाल ने देश की सुरक्षा के लिए कई साल तक सेवाएं दीं। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में काम किया और कमांडो दस्ते का हिस्सा भी रहे। उन्हें जम्मू-कश्मीर में बटालियन की कमान संभालने की जिम्मेदारी भी मिली थी।

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उनके करियर में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की सेवा भी काफी अहम रही। साल 1985 से 1997 तक उन्होंने प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान एशियाई खेलों, गुटनिरपेक्ष सम्मेलन और राष्ट्रमंडल सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में भी उन्होंने योगदान दिया। उनकी शानदार सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
करीब दो दशक तक सुरक्षा बलों में सेवाएं देने के बाद नंदलाल ने साल 2007 में ITBP से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। अपने पहले ही चुनाव में जीत हासिल कर उन्होंने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार चार बार रामपुर से विधायक चुने गए।

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नंदलाल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता था। रामपुर में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और संगठन को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने क्षेत्र में पार्टी के लिए लगातार काम किया। लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतना इस बात का सबूत था कि रामपुर की जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ थी। क्षेत्र के लोग उन्हें एक मजबूत राजनीतिक नेता के रूप में जानते थे।
विधायक बनने के बाद नंदलाल को सरकार और विधानसभा में कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं। साल 2013 से 2017 तक वह मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रहे। इसके बाद 2018 से 2022 तक विधानसभा की कल्याण और ग्रामीण नियोजन समितियों से जुड़े रहे।

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साल 2022 में चौथी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया। इसके अलावा उन्हें लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट (LADA) कमेटी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
नंदलाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU), शिमला से साल 1976 में राजनीति विज्ञान विषय में MA की पढ़ाई पूरी की थी।

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पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सुरक्षा बलों में भर्ती हो गए और देश की सेवा में जुट गए। करीब तीन दशक तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा। यहां भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और रामपुर की राजनीति में अहम स्थान हासिल किया।