कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में मौसम के बदलते तेवर अब सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, जानवरों पर भी भारी पड़ने लगे हैं। कांगड़ा जिले के निचले इलाकों में कुत्तों में तेजी से फैल रहा पार्वो वायरस अब चिंता का बड़ा कारण बन चुका है। यह वायरस न सिर्फ पालतू बल्कि आवारा कुत्तों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
क्या है पार्वो वायरस?
पार्वों वायरस एक जानलेवा वायरस है। यह वायरस एक प्रकार का कैनाइन संक्रमण है, जो कुत्तों में बेहद तेजी से फैलता है। खासकर छोटे पिल्लों और कमजोर इम्युनिटी वाले कुत्तों के लिए यह घातक साबित हो सकता है। कई मामलों में यह संक्रमण दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाकर जानलेवा बन जाता है।
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पार्वो वायरस के लक्षण
पार्वो वायरस के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-
- उल्टी
- दस्त
- खाना न खाना
- सुस्ती
- शरीर का निर्बल होना
क्या है वायरस के फैलने का कारण?
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि गर्मी और मौसम में बदलाव इस वायरस के फैलने की मुख्य वजह बन रहे हैं। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से यह बीमारी तेजी से फैलती है, जिससे एक स्वस्थ कुत्ता भी जल्द बीमार पड़ सकता है।
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कहां पर ज्यादा खतरा?
अब तक नूरपुर, फतेहपुर, इंदौरा, जवाली और देहरा जैसे क्षेत्रों में पार्वो वायरस के कई केस सामने आ चुके हैं। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और लोगों से अपील की है कि वे अपने पालतू कुत्तों का समय पर टीकाकरण करवाएं।
कैसे करें बचाव?
पार्वो वायरस से आप ऐसे बचाव भी कर सकते हैं-
- कुत्ते की उम्र 6 हफ्ते पूरी होते ही पहला टीका लगवाएं।
- सालाना वैक्सीनेशन जरूरी है।
- बीमार या संक्रमित जानवरों से दूरी बनाएं।
- कुत्ते की सफाई और खान-पान का विशेष ध्यान रखें।
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जा सकती है जान
यह संक्रमण जितना गंभीर है, उससे बचाव भी उतना ही आसान है—अगर सही समय पर टीकाकरण और सावधानी बरती जाए। ऐसे में जरूरी है कि हर पशुपालक अपने पालतू कुत्ते की सुरक्षा को गंभीरता से ले और लापरवाही से बचे, क्योंकि एक छोटी सी चूक मासूम जानवर की जान ले सकती है।
