शिमला/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हो रहे महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे। हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर आज हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों के बीच समझौता होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच MoU साइन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने इस समझौते को हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि किशाऊ परियोजना से हिमाचल को बिना किसी निवेश के हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की आय होगी। मुख्यमंत्री के अनुसार यह प्रदेश के आर्थिक हितों की रक्षा और राज्य की बहुमूल्य जल संपदा के बेहतर उपयोग की दिशा में बड़ा कदम है।
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आज दिल्ली में होगा बड़ा फैसला
किशाऊ परियोजना को लेकर करीब 17 वर्षों से चली आ रही अड़चनों के बाद अब इसके आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। पानी के बंटवारे, परियोजना की लागत और राज्यों की आर्थिक भागीदारी को लेकर लंबे समय से सहमति नहीं बन पा रही थी। अब केंद्र सरकार की पहल के बाद छह राज्यों के बीच सहमति बनी है। इसी सहमति को औपचारिक रूप देने के लिए आज नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।
सुक्खू बोले- हिमाचल के लिए गर्व का दिन
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने MoU से पहले इसे हिमाचल के लिए गर्व का दिन बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने परियोजना को लेकर प्रदेश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया, जिससे हिमाचल पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
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मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछली भाजपा सरकार के समय परियोजना में हिमाचल की ओर से 90 प्रतिशत धनराशि देने की बात स्वीकार की गई थी। इससे प्रदेश के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता था। मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था पर अपना पक्ष मजबूती से रखा और हिमाचल के आर्थिक हितों की रक्षा की।
बिना पैसा लगाए हिमाचल को हर साल 600 करोड़ की उम्मीद
किशाऊ परियोजना से हिमाचल के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य को परियोजना में भारी निवेश किए बिना आर्थिक लाभ मिलने की व्यवस्था बन रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार हिमाचल को परियोजना से करीब 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी और इससे राज्य को सालाना लगभग 600 करोड़ रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। ऐसे में यह समझौता हिमाचल के लिए आर्थिक और ऊर्जा दोनों मोर्चों पर अहम माना जा रहा है।
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90 फीसदी खर्च केंद्र के जिम्मे, राज्यों पर घटेगा बोझ
नई व्यवस्था के तहत परियोजना के वाटर कंपोनेंट की करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी। शेष 10 प्रतिशत राशि छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी। इस व्यवस्था से परियोजना में राज्यों पर पड़ने वाला वित्तीय भार पहले की तुलना में काफी कम होगा। हिमाचल के लिए विशेष रूप से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की ओर से परियोजना पर बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश का दबाव कम होगा।
हिमाचल के पानी के बदले बिजली में मिलेगा लाभ
किशाऊ परियोजना के समझौते में हिमाचल के हितों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था भी शामिल है। हिमाचल के हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान के लिए किया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के हिस्से से जुड़े बिजली घटक की लागत वहन करेंगे। यानी हिमाचल अपनी जल संपदा का उपयोग होने देने के बदले परियोजना के बिजली हिस्से में आर्थिक लाभ हासिल करेगा। इसी व्यवस्था को राज्य सरकार हिमाचल के हित में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देख रही है।
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660 मेगावाट बिजली और 1324 MCM पानी का भंडारण
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। परियोजना स्थल हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र की सीमा के आसपास स्थित है। प्रस्तावित परियोजना की स्थापित बिजली क्षमता 660 मेगावाट होगी। इसमें 165 मेगावाट की चार इकाइयां प्रस्तावित हैं। बांध में करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण की क्षमता विकसित की जाएगी।
सिंचाई से लेकर पेयजल तक, कई राज्यों को मिलेगा फायदा
किशाऊ परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली पैदा करना नहीं है। इसके जरिए ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण बढ़ाने के साथ सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए जल उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना से करीब 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही दिल्ली और अन्य संबंधित राज्यों को पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने में भी इसका योगदान होगा।
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236 मीटर ऊंचा बांध, सालाना 1379 मिलियन यूनिट बिजली
परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके पूरा होने के बाद सालाना करीब 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। इस परियोजना को ऊपरी यमुना बेसिन में जल प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पर्याप्त जल भंडारण होने से विभिन्न राज्यों की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
17 साल का इंतजार खत्म होने की उम्मीद
किशाऊ परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया था। इसके बावजूद राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह परियोजना वर्षों तक कागजों और बैठकों तक सीमित रही। अब जून 2026 में केंद्र की पहल के बाद छह राज्यों के बीच बनी सहमति और आज होने वाले MoU से परियोजना के जमीन पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
