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September 15, 2026

हिमाचल : 6 साल के शिवाक्ष का गजब कारनामा- 195 देशों के झंडे याद कर बनाया रिकॉर्ड

सिर्फ 12 मिनट 56 सेकंड में 195 देशों के झंडों को पहचान बताए नाम

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Shivaksh Rapta  India Book of Records IBR Achiever Shimla Child Prodigy World Map

शिमला। आमतौर पर छह साल की उम्र में बच्चों की दुनिया कार्टून, खिलौनों और स्कूल की छोटी-छोटी किताबों तक होती है। लेकिन शिमला के चौपाल का एक नन्हा बच्चा ऐसा है, जिसकी दुनिया में 195 देश घूमते हैं। वह भी सिर्फ नाम से नहीं, बल्कि उनके झंडे और नक्शे पर उनकी जगह तक याद है। मडावग के छह वर्षीय शिवाक्ष रापटा ने अपनी इसी गजब की याददाश्त के दम पर India Book of Records में जगह बना ली है।

195 देशों के झंडे पहचान बनाया रिकॉर्ड

शिवाक्ष को ‘IBR Achiever’ के खिताब से सम्मानित किया गया है। उन्होंने महज 12 मिनट 56 सेकंड में दुनिया के सभी 195 देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बताए। इसके साथ ही आउटलाइन वर्ल्ड मैप पर इन देशों की भौगोलिक स्थिति भी सही-सही बताई।

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छोटी उम्र, लेकिन कमाल की याददाश्त

शिवाक्ष की उपलब्धि सिर्फ देशों के झंडे पहचानने तक सीमित नहीं रही। रिकॉर्ड के लिए उन्हें एक साथ दो चुनौतियां पूरी करनी थीं। पहली, अलग-अलग देशों के झंडों को देखकर उनकी पहचान करना और नाम बताना। दूसरी, उन्हीं देशों को विश्व के आउटलाइन मैप पर सही जगह चिन्हित करना। नन्हे शिवाक्ष ने दोनों ही काम निर्धारित प्रक्रिया के तहत महज 12 मिनट 56 सेकंड में पूरे कर दिए।

 

नन्हे शिवाक्ष के दिमाग में बसा पूरा वर्ल्ड मैप, 12 मिनट में कर दिया बड़ा कमाल

24 अगस्त को रिकॉर्ड की हुई पुष्टि

India Book of Records की ओर से जारी प्रमाण पत्र के अनुसार शिवाक्ष की उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि 24 अगस्त 2026 को हुई। इसके बाद 5 सितंबर 2026 को उन्हें रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र जारी किया गया।

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प्रमाण पत्र पर India Book of Records के मुख्य संपादक डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी के हस्ताक्षर हैं। रिकॉर्ड में शिवाक्ष की झंडों की पहचान और विश्व मानचित्र पर देशों की स्थिति बताने की क्षमता को दर्ज किया गया है।

अभी LKG में पढ़ रहे हैं शिवाक्ष

शिवाक्ष का जन्म 31 जुलाई 2020 को हुआ था और वह फिलहाल शिमला के एक निजी स्कूल में LKG के छात्र हैं। इतनी कम उम्र में 195 देशों के झंडों और उनकी भौगोलिक स्थिति को याद कर लेना उनकी असाधारण रुचि और स्मरण शक्ति को दिखाता है।

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अलग-अलग झंडों के नाम जानने की दिलचस्पी

परिवार के अनुसार शिवाक्ष को छोटी उम्र से ही अलग-अलग देशों के झंडों और उनके नाम जानने में खास दिलचस्पी थी। इसके बाद उन्होंने विश्व मानचित्र पर उन देशों को तलाशना शुरू किया। देखते ही देखते उनकी यह दिलचस्पी एक मजबूत जानकारी में बदल गई।

सेब के बगीचे से रिकॉर्ड बुक तक पहुंचा परिवार

शिवाक्ष के पिता राजेश रापटा सेब बागवान हैं, जबकि उनकी मां किरण रापटा गृहणी हैं। ग्रामीण और बागवानी पृष्ठभूमि से आने वाले इस परिवार के लिए बेटे की यह उपलब्धि बेहद खास है।

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छोटी उम्र में बड़ी पहचान

शिवाक्ष ने चौपाल के मडावग जैसे पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया है- जिसने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को गर्व करने का मौका दिया है। उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि किसी बच्चे की प्रतिभा को पहचानने और उसे प्रोत्साहन देने से वह छोटी उम्र में भी बड़ी पहचान हासिल कर सकता है।

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