शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई की उल्टी गिनती शुरू होते ही मंत्री विक्रमादित्य सिंह का लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़कों को चकाचक करने के मिशन में जुटने जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेशभर में करीब 2500 किलोमीटर सड़कों की टायरिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके लिए लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बारिश थमने और पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर शुरू होने के बीच मिलने वाले सीमित समय में सड़कों की हालत सुधारने के लिए विभाग युद्ध स्तर पर काम करेगा। विभाग ने अफसरों को दो महीने का सख्त डेडलाइन लक्ष्य थमाया है, ताकि कड़ाके की ठंड और बर्फबारी से पहले प्रदेश की जीवनरेखाएं पूरी तरह सुधर सकें।
बारिश थमते ही सड़कों पर दौड़ेंगी मशीनें
PWD ने अधिकारियों को पहले से ही तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि मौसम खुलते ही टायरिंग का काम शुरू करने में किसी तरह की देरी न हो। जिन सड़कों को टायरिंग के लिए चिन्हित किया गया है, वहां आवश्यक औपचारिकताएं, टेंडर प्रक्रिया और अन्य तैयारियां समय रहते पूरी करने को कहा गया है। विभाग की कोशिश है कि मानसून के बाद जैसे ही सड़क निर्माण के लिए मौसम अनुकूल हो, उसी समय काम शुरू कर दिया जाए। यानी बारिश खत्म होते ही हिमाचल की सड़कों पर पैचवर्क और टायरिंग की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है।
यह भी पढ़ें : IGMC में प्रेग्नेंट महिला की मौ**त- KNH से हुई थी रेफर, 7 माह के शिशु ने भी गर्भ में तोड़ा दम
दो महीने में 2500 किलोमीटर सड़कें सुधारने का लक्ष्य
पहाड़ी राज्य हिमाचल में सड़क टायरिंग के लिए मौसम की बड़ी भूमिका रहती है। नवंबर के मध्य के बाद ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान तेजी से गिरने लगता है और कई क्षेत्रों में बर्फबारी भी शुरू हो जाती है। ऐसे मौसम में टायरिंग का काम प्रभावी ढंग से करना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से विक्रमादित्य सिंह के PWD ने करीब दो महीने की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए काम की रणनीति तैयार की है। विभाग का लक्ष्य है कि उपलब्ध समय का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए ज्यादा से ज्यादा किलोमीटर सड़कों को नई टायरिंग से दुरुस्त किया जाए।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : 6 साल के शिवाक्ष का गजब कारनामा- 195 देशों के झंडे याद कर बनाया रिकॉर्ड
इस बार सड़कों पर ज्यादा मार, विभाग के सामने बड़ी चुनौती
इस साल प्रदेश की कई सड़कों की हालत पहले के मुकाबले ज्यादा खराब बताई जा रही है। बरसात ने जहां कई सड़कों को नुकसान पहुंचाया, वहीं निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी टायरिंग के काम की रफ्तार प्रभावित की। विशेष रूप से बिटुमिन की कीमतों में उछाल के कारण कई स्थानों पर सड़क टायरिंग का काम अपेक्षाकृत कम हो पाया। अब विभाग ने इस कमी को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर टायरिंग अभियान चलाने की तैयारी की है।
2500 किलोमीटर सड़कों पर खर्च होंगे 350 करोड़
PWD की योजना के तहत प्रदेश में लगभग 2500 किलोमीटर सड़कों की टायरिंग की जानी है। इस पूरे अभियान पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विभाग का फोकस सिर्फ सड़कों की ऊपरी सतह सुधारने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जहां आवश्यक होगा वहां सड़क को टायरिंग के लिए तैयार करने का काम भी तेजी से किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : 22 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा अफसर- वन विभाग ने किया सस्पेंड, अब जेल में कटेगी उम्र
2500 किलोमीटर के इस बड़े लक्ष्य में अलग-अलग योजनाओं के तहत सड़कों को शामिल किया गया है। इनमें करीब 1100 किलोमीटर सड़कें Annual Maintenance Plan के तहत टायर की जाएंगी।
इसके अलावा लगभग 1126 किलोमीटर सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत और करीब 351 किलोमीटर सड़कें NABARD के माध्यम से टायरिंग के दायरे में लाई गई हैं। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की कई महत्वपूर्ण सड़कों को भी बेहतर बनाने की उम्मीद है।
जहां बारिश कम, वहां शुरू हुआ काम
प्रदेश के जिन डिविजनों में बारिश का प्रभाव कम है, वहां कुछ स्थानों पर टायरिंग का काम शुरू भी किया जा चुका है। वहीं लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में मौसम खुलने का इंतजार किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि ऐसे क्षेत्रों में भी टेंडर और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पहले से पूरी कर ली जाएं, ताकि मौसम अनुकूल होते ही काम शुरू किया जा सके।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : जेल से छूटते ही अस्पताल पहुंचा शातिर, साथी संग किया बड़ा कांड- मरीजों में हड़कंप
विक्रमादित्य सिंह के विभाग के सामने समय की चुनौती
लोक निर्माण विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती सड़क टायरिंग के बड़े लक्ष्य को सीमित समय में पूरा करना है। पहाड़ों में मौसम तेजी से बदलता है और नवंबर के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के साथ बर्फबारी शुरू हो जाती है। ऐसे में विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में PWD की रणनीति साफ है—मानसून खत्म होते ही काम की रफ्तार बढ़ाई जाए और बर्फबारी से पहले ज्यादा से ज्यादा सड़कों को नई टायरिंग से चमका दिया जाए।
