नाहन। हिमाचल प्रदेश में गांव की सरकार चुनने का समय आ गया है। हालांकि दिसंबर में होने वाले पंचायती राज चुनाव जरूर टल गए हैं, लेकिन प्रदेश में पंचायतों की कमान अपने हाथ में लेने वालों ने अपने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस सब के बीच हिमाचल का सिरमौर जिला इस बार एक अनोखे सामाजिक प्रयोग की वजह से सुर्खियों में आ गया है।

राजनीति से हटकर शुरू की नई पहल

यहां की एक पंचायत में पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे से हटकर अब गांव की सरकार योग्यता के आधार पर चुनने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब विकास खंड की शिवा ग्राम पंचायत में प्रधान पद के लिए मेरिट.आधारित चयन प्रक्रिया शुरू की गई है। यदि यह पहल सफल रहती है तो यह पंचायत स्तर पर लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।

 

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इस अभिनव पहल की शुरुआत श्री पांवटा साहिब विकास मंच के माध्यम से की गई है, जिसका नेतृत्व पूर्व संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग ज्ञान सिंह चौहान कर रहे हैं। मंच का उद्देश्य राजनीति से परे एक ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें गांव का नेतृत्व योग्यता, सामाजिक सेवा और दृष्टिकोण विज़न के आधार पर चुना जाए।

जाति, धनबल की राजनीति से हटकर पारदर्शी चयन की ओर

हिमाचल में पंचायत चुनावों पर लंबे समय से जातिगत समीकरणों, राजनीतिक प्रभाव और धनबल का असर देखा जाता रहा है। लेकिन इस बार शिवा पंचायत में उम्मीदवारों के लिए पारदर्शी और मेरिट.आधारित मानदंड तय किए गए हैं। इसके तहत कुल 10 अंकों का मूल्यांकन किया जाएगा।

 

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  • शैक्षणिक योग्यता के लिए अधिकतम 6 अंक
  • समाज सेवा और योगदान के लिए 3 अंक
  • और साक्षात्कार एवं विज़न के लिए 2 अंक निर्धारित किए गए हैं।

उपयुक्त उम्मीदवार ना मिलने पर खाली रहेगा प्रधान पद

सबसे खास बात यह है कि यदि इंटरव्यू पैनल को कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलता, तो प्रधान पद को खाली छोड़ने का प्रावधान रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल योग्य और जिम्मेदार व्यक्ति ही पंचायत का नेतृत्व करें।

 

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बिना खर्च और बिना राजनीतिक झंडे के चुनाव मॉडल

पारंपरिक चुनावों में जहां लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, वहीं यह चयन प्रक्रिया बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आयोजित की जा रही है। मंच का दावा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी दबाव को इसमें स्थान नहीं दिया जाएगा। ज्ञान सिंह चौहान का कहना है कि गांव का विकास सही नेतृत्व से ही संभव है। पंचायतों में जब तक पढ़े.लिखे और समाज के प्रति जवाबदेह लोग नहीं आएंगे, तब तक बदलाव मुश्किल है। हमारा लक्ष्य राजनीति को योग्यता और सेवा से जोड़ना है।

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भविष्य में बन सकता है राज्य के लिए रोल मॉडल

यह पहल हिमाचल के पंचायत चुनावों में एक नई राजनीतिक संस्कृति की नींव रख सकती है। इससे न केवल जाति और धनबल की राजनीति को चुनौती मिलेगी, बल्कि पढ़े.लिखे युवाओं को भी लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य पंचायतें भी इसे अपनाने पर विचार कर सकती हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाला कदम बताया है।

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