कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का 26 वर्षीय बहादुर बेटा देश सेवा करते हुए शहीद हो गया। आज सुबह शहीद अक्षित शर्मा की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची। जहां पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पंचतत्व में विलीन शहीद अक्षित
जिस घर में कल तक हंसी गूंज रही थी, अक्षित की शहादत के बाद आज वहां मातम पसरा हुआ है। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है। अक्षित की अंतिम विदाई के बाद माता-पिता बेसुध हैं। लोग परिवार को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं। हर कोई यही कह रहा है कि इतनी छोटी उम्र में बेटे ने देश के लिए बड़ी कुर्बानी दे दी।
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ट्रेनिंग के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, जवान जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सुंदरबनी क्षेत्र में तैनात थे और कमांडो की ट्रेनिंग ले रहा था। यहां सैनिकों को भारतीय सेना की ओर से नदी पार करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान सोमवार दोपहर के समय मिनावर तवी नदी में अभ्यास करते वक्त अचानक वह गहरे पानी में चले गए और लापता हो गए।
रात भर चला तलाश अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही सेना के अधिकारियों ने तुरंत खोज अभियान शुरू कर दिया। जवानों के साथ स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमों ने भी नदी के आसपास तलाशी अभियान चलाया, लेकिन देर रात तक उनका कोई पता नहीं चल पाया। इसके बाद मंगलवार सुबह सेना के गोताखोरों की मदद से फिर से सर्च अभियान शुरू किया गया, जिसके दौरान नदी से उनका पार्थिव शरीर बरामद किया गया।
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परिवार का था इकलौता बेटा
बैजनाथ पपरोला नगर परिषद के वार्ड नंबर 6 उस्तेहड़ गांव के निवासी सिपाही अक्षित शर्मा अपने माता-पिता की इकलौता बेटा था। पिता विजय कुमार और माता रेनुवाला ने कड़ी मेहनत कर उसा पालन पोषण किया था। बेटे के सेना में भर्ती होने के बाद परिवार काफी खुश था।
पिता ने खूब मेहनत कर पढ़ाया बेटा
विजय कुमार कभी बैजनाथ शिव मंदिर के परिसर में स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी हुआ करते थे। पूजा पाठ से जो कुछ बचता था, उसके सहारे उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाया। अक्षित अभी अविवाहित थे।
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शादी की करने लगे थे तैयारी
शहीद जवान अक्षित के पिता विजय कुमार बताते हैं कि बेटे की शादी के लिए अब तैयारी शुरू कर दी थी। आज भी यह परिवार अपने पुराने मकान में रहता है। बेटा सेना में हुआ, तो उसके अच्छे भविष्य उसकी शादी के सपनों के साथ माता-पिता ने पुश्तैनी घर से कुछ मीटर की दूरी पर एक नया मकान भी तैयार कर लिया। आजकल उस मकान में प्रतिष्ठा यानी प्रवेश की तैयारी चल रही थी।
सात साल से देश सेवा में था जवान
बताया जा रहा है कि अक्षित पिछले सात वर्षों से सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे और पंजाब रेजिमेंट का हिस्सा थे। कम उम्र में ही उन्होंने सेना की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना पूरा किया था। अपने कर्तव्य और अनुशासन के कारण वह साथियों के बीच भी बेहद सम्मानित माने जाते थे। बताया जा रहा है कि जवान अक्षित ने ट्रेनिंग के बाद छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी, लेकिन अब वह तिरंगा ओढ़ कर घर पहुंचेगा।
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घर में पसरा सन्नाटा
अक्षित का परिवार बैजनाथ के प्रसिद्ध बैजनाथ शिव मंदिर से जुड़ा रहा है। उनके पिता पहले यहां पुजारी के रूप में सेवा दे चुके हैं। जिस घर में कल तक खुशियों की रौनक थी, वहां आज सन्नाटा और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। बेटे की शहादत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
वीरभूमि हिमाचल को शहीद पर गर्व
हिमाचल प्रदेश को वीरों की भूमि कहा जाता है और यहां के युवाओं ने हमेशा देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। अक्षित शर्मा की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमाचल का हर बेटा देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहता है। हालांकि यह गर्व का क्षण हैए लेकिन बेटे को खोने का दर्द परिवार और पूरे प्रदेश को गहरे तक झकझोर गया है।
