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June 8, 2026

सुक्खू सरकार का एक और बड़ा फैसला: इन अधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर चलाई कैंची

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन निगम के बड़े अधिकारियों की विशेष सुविधाएं खत्म

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Himachal Pradesh Sukhu Government

शिमला। हिमाचल प्रदेश की कमजोर होती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए सुक्खू सरकार लगातार सख्त फैसले ले रही है। खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन लागू करने की दिशा में सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है, जिसका असर विभिन्न विभागों, योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर देखने को मिला है। अब सरकार ने खर्चों पर लगाम कसने के अभियान के तहत एक और बड़ा निर्णय लिया है, जिसका सीधा प्रभाव हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) से जुड़े उच्च पदाधिकारियों पर पड़ेगा।

 

सरकार ने पर्यटन निगम के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और निदेशक मंडल के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों को वर्षों से मिल रही विशेष रियायतों और सुविधाओं को समाप्त करने का फैसला लिया है। सरकार की मंजूरी के बाद यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

विशेषाधिकारों पर चली कैंची

पर्यटन निगम के वरिष्ठ पदाधिकारियों को निगम के होटलों में ठहरने, भोजन करने और अन्य सुविधाओं में विशेष छूट मिलती थी। अब सरकार ने इन सभी रियायतों को समाप्त करने का निर्णय लेते हुए साफ संकेत दिया है कि आर्थिक अनुशासन के दौर में विशेष सुविधाओं का बोझ सरकारी संस्थानों पर नहीं डाला जाएगा। सरकार का मानना है कि वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्य में अनावश्यक खर्चों को कम करना समय की आवश्यकता है और हर स्तर पर बचत सुनिश्चित करनी होगी।

 

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100 रुपये में मिलता था कमरा, अब खत्म हुई व्यवस्था

अब तक पर्यटन निगम के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को निगम के होटलों में बेहद रियायती दरों पर ठहरने की सुविधा प्राप्त थी। उन्हें मात्र 100 रुपये प्रतिदिन के शुल्क पर कमरा उपलब्ध कराया जाता था, जबकि भोजन पर भी 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाती थी। इतना ही नहीं, सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी इन पदाधिकारियों को भोजन और आवास पर रियायतें मिलती रहती थीं। नई व्यवस्था के तहत इन सभी सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है।

जीवनभर मिलने वाली छूट भी हुई बंद

निदेशक मंडल के सरकारी और गैर-सरकारी निदेशकों को भी बैठकों में भाग लेने के दौरान मुफ्त आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती थी। इसके अलावा उन्हें जीवनभर पर्यटन निगम के होटलों में ठहरने और भोजन पर 30 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलता था। सरकार ने इस व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया है। अब इन पदाधिकारियों को अन्य सामान्य ग्राहकों की तरह निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।

 

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पारिवारिक आयोजनों पर मिलने वाली रियायतें भी खत्म

सरकार ने उन विशेष छूटों को भी समाप्त कर दिया है जो वरिष्ठ अधिकारियों को निजी पारिवारिक आयोजनों के लिए दी जाती थीं। पहले प्रबंध निदेशक के बेटे या बेटी की शादी के अवसर पर आवास, भोजन और परिवहन सेवाओं पर विशेष रियायतें मिलती थीं। नई व्यवस्था के तहत अब ऐसी सभी सुविधाएं और छूट पूरी तरह समाप्त कर दी गई हैं।

कर्मचारियों को मिलती रहेंगी निर्धारित रियायतें

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यटन निगम के नियमित कर्मचारियों को मिलने वाली निर्धारित रियायतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारियों के लिए पहले से लागू सुविधाएं जारी रहेंगी, जबकि पदाधिकारियों को मिलने वाले विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।

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खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन पर जोर

सरकार का मानना है कि इस फैसले से पर्यटन निगम के अनावश्यक खर्चों में कमी आएगी और निगम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में आर्थिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच सुक्खू सरकार का यह फैसला एक स्पष्ट संदेश देता है कि वित्तीय सुधारों की प्रक्रिया में अब विशेष सुविधाओं और अतिरिक्त खर्चों की समीक्षा की जा रही है। आने वाले समय में खर्चों पर नियंत्रण को लेकर सरकार की ओर से ऐसे और भी निर्णय सामने आ सकते हैं।

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