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June 9, 2026

सीएम सुक्खू चले दिल्ली, PM मोदी के टेबल पर रखेंगे हिमाचल की 4 बड़ी मांगें; बदलेगी सूबे की तकदीर?

सीएम सुक्खू पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली नीति आयोग की बैठक में रखेंगे अपनी बात

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cm sukhu visit delhi

शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी को नए पंख लगाने और राज्य के हक की आवाज बुलंद करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू देश की राजधानी दिल्ली जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली नीति आयोग की 'गवर्निंग काउंसिल' की हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू विशेष रूप से शामिल होंगे। 11 जून को होने वाली इस महा-बैठक में हिमाचल के हितों की रक्षा और राज्य के विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री चार सबसे मुख्य मुद्दों को देश के सर्वोच्च मंच पर पुरजोर तरीके से रखेंगे। इस महत्वपूर्ण दौरे में उनके साथ राज्य के मुख्य सचिव भी दिल्ली जा रहे हैं।

दिल्ली में गूंजेगी हिमाचल की आवाज

नीति आयोग की यह गवर्निंग काउंसिल केंद्र और राज्यों के बीच नीति समन्वय का सबसे बड़ा और सर्वोच्च मंच माना जाता है। इस बैठक में देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारी एक मेज पर बैठेंगे। 

 

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तय एजेंडे के मुताबिक, बैठक में मानव संसाधन विकास, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। लेकिन हिमाचल के लिहाज से यह बैठक इसलिए सबसे ज्यादा खास है, क्योंकि सीएम सुक्खू यहां सीधे प्रधानमंत्री के समक्ष सूबे की वित्तीय सेहत को सुधारने का रोडमैप पेश करेंगे।

बैठक में चार मुद्दों को उठाएंगे सीएम सुक्खू 

नीति आयोग क्योंकि देश की नीतियां तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है, इसलिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए चार मुख्य मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है

  • आरडीजी (RDG) बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई: रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) में कटौती या इसे बंद किए जाने से हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को जो भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, मुख्यमंत्री उसकी भरपाई के लिए केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग करेंगे।
  • जीएसटी (GST) क्षतिपूर्ति की मांग: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से हिमाचल जैसे उपभोक्ता राज्य को जो राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, उसकी व्यावहारिक और प्रभावी क्षतिपूर्ति व्यवस्था की मांग को दोबारा उठाया जाएगा।
  • प्राकृतिक आपदाओं का 'प्रैक्टिकल' मुआवजा: हिमाचल हर साल भारी बरसात, लैंडस्लाइड और प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेलता है। सीएम सुक्खू इसके लिए एक ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था की वकालत करेंगे जिससे राज्य को समय पर और पर्याप्त केंद्रीय मदद मिल सके।
  • वनों की रक्षा के बदले 'ग्रीन बोनस': हिमाचल पूरे उत्तर भारत को स्वच्छ हवा और पर्यावरण देता है। अपने घने जंगलों की रक्षा के बदले हिमाचल लगातार 'ग्रीन बोनस' की मांग कर रहा है। वित्त आयोग के बाद अब सीएम इस मुद्दे को नीति आयोग में भी प्रमुखता से रखेंगे।

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रोजगार और उद्योगों की जरूरतों पर भी होगी चर्चा

इस बैठक में केवल वित्तीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि हिमाचल के युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। उद्योगों की मांग के अनुसार राज्य के युवाओं को कुशल (Skilled) बनाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और राज्य में उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र से तकनीकी और बजटीय सहयोग मांगा जाएगा। इसके अलावा, हिमाचल को 'ग्रीन स्टेट' बनाने के संकल्प को गति देने के लिए स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार (Innovation) के क्षेत्रों में भी राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया जाएगा।

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हिमाचल को बड़ी उम्मीदें

प्रदेश के लोगों की नजरें अब इस बैठक पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री सुक्खू हिमाचल की वित्तीय जरूरतों, पर्यावरणीय योगदान और आपदा संबंधी चुनौतियों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे, जिससे आने वाले समय में प्रदेश को अतिरिक्त सहायता और राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

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