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June 9, 2026

हिमाचल: 24 डिफाल्टरों की संपत्तियां नीलाम कर रहा बैंक, घर-भवन-जमीनें सब बिकेगा; इस दिन लगेगी बोली

बैंक इन डिफाल्टरों की संपत्तियां नीलाम कर करेगा करोड़ों की रिकवरी

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Bank Defaulters Property Auction

सोलन। हिमाचल प्रदेश में बैंक का करोड़ों रुपया डकार कर बैठे बड़े डिफाल्टरों की नींद अब उड़ने वाली है। देवभूमि के बैंकिंग सेक्टर में डिफाल्टरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित बघाट बैंक ने साफ कर दिया है कि जनता की गाढ़ी कमाई पर कुंडली मारकर बैठे लोगों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

 

बैंक इन डिफाल्टरों की घर, जमीन, आलीशान भवनों सहित अन्य सभी संपत्तियों को नीलाम कर अपने एक-एक पैसे की भरपाई (रिकवरी) करने जा रहा है। इस कड़ी में सोलन और बद्दी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के कई बड़े रसूखदारों की संपत्तियां बैंक पहले ही अपने कब्जे में ले चुका है, जिनकी अब खुले बाजार में बोली लगने जा रही है।

इस दिन होगी महा नीलामी

बैंक प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इच्छुक खरीदार 11 जून 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके ठीक अगले दिन, यानी 12 जून को ऑनलाइन नीलामी (ई-ऑक्शन) का आयोजन किया जाएगा। इस दिन डिजिटल हथौड़े की एक गूंज से डिफाल्टरों के आलीशान आशियाने और बेशकीमती जमीनें दूसरों के नाम हो जाएंगी। बैंक का मुख्य फोकस उन बड़े मगरमच्छों पर है जिन्होंने लोन के नाम पर करोड़ों रुपये तो लिए, लेकिन किस्तें चुकाने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए।

 

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करोड़ों की संपत्तियां बिक्री के लिए तैयार

इस महा-नीलामी में सबसे बड़ी कार्रवाई बद्दी के एक नामी कारोबारी और देहूंघाट के एक डिफाल्टर पर होने जा रही है। बद्दी के बड़े उद्योगपति की 3.56 करोड़ रुपये की संपत्ति को नीलामी की लिस्ट में डाला गया है, जिसमें एक भव्य भवन और एक बीघा से अधिक की कीमती जमीन शामिल है। वहीं, देहूंघाट के एक अन्य डिफाल्टर ने लोन लेकर किस्तें नहीं चुकाईं, जिससे उसकी देनदारी 1.65 करोड़ रुपये पहुंच गई है। अब बैंक उसकी तीन अलग-अलग संपत्तियों को बेचकर अपना पैसा वसूलेगा। कुल मिलाकर 24 बड़े डिफाल्टरों की करीब 8 से 10 करोड़ रुपये की संपत्तियां दांव पर लगी हैं।

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डिफाल्टरों के घर जमीन बेच पैसे वसूल करेगा बैंक

बैंकिंग नियमों के तहत जब कोई उधारकर्ता लंबे समय तक ऋण नहीं चुकाता, तो बैंक को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उसकी गिरवी रखी गई संपत्तियों पर कार्रवाई करने का अधिकार होता है। इसी कड़ी में अब डिफाल्टरों के घर, दुकानें, भवन और जमीनें बैंक की रिकवरी का प्रमुख माध्यम बन रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई न केवल बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत करती है बल्कि समय पर ऋण चुकाने की संस्कृति को भी बढ़ावा देती है।

एनपीए घटाने की दिशा में बड़ा कदम

बैंक का बकाया ऋण (एनपीए) अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में रिकवरी अभियानों के चलते इसमें कमी दर्ज की गई है। बैंक प्रबंधन का मानना है कि यदि नीलामी में पर्याप्त संपत्तियां बिक जाती हैं तो फंसी हुई राशि का बड़ा हिस्सा वापस आ सकता है और बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा।

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जुलाई में हो सकता है अहम फैसला

बैंक पर लागू वित्तीय प्रतिबंधों और निगरानी से जुड़े मामलों पर आने वाले समय में महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है। बैंक प्रबंधन लगातार रिकवरी बढ़ाने और बकाया ऋण कम करने के प्रयासों में जुटा है। ऐसे में नीलामी प्रक्रिया को बैंक के लिए राहत देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

रिकवरी अभियान से बढ़ी हलचल

हिमाचल प्रदेश में डिफाल्टरों की संपत्तियों की नीलामी की खबर के बाद बैंकिंग क्षेत्र और संपत्ति बाजार में भी हलचल बढ़ गई है। कई निवेशक और खरीदार नीलामी प्रक्रिया में रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें बाजार मूल्य से कम दरों पर संपत्तियां मिलने की संभावना रहती है। दूसरी ओर यह कार्रवाई उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी मानी जा रही है जो बैंक ऋण लेने के बाद भुगतान में लापरवाही बरतते हैं।

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बैंक का संदेश साफ

बैंक प्रबंधन का कहना है कि ऋण की राशि जनता की जमा पूंजी से संचालित होती है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बैंक की जिम्मेदारी है। इसलिए बड़े डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर अन्य संपत्तियों को भी नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

क्या कहते हैं बैंक प्रबंधक

बघाट बैंक सोलन के प्रबंध निदेशक राजकुमार कश्यप ने कहा कि 12 जून को सोलन और बद्दी क्षेत्र के 24 बड़े डिफाल्टरों की जमीनों और भवनों की नीलामी की जाएगी। यदि ये संपत्तियां बिकती हैं, तो बैंक को वित्तीय रूप से बहुत बड़ी राहत मिलेगी और एनपीए कम होगा।

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