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June 9, 2026
कभी हिमाचल कांग्रेस के दिग्गजों में आता था इनका नाम, पूर्व लगते ही सील हो गया करोड़ों का होटल- जानें क्यों
पूर्व कांग्रेस नेता ने बैंक से लिया था करोड़ों रुपये का ऋण
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में लंबे समय से चर्चाओं में रहे बैंक ऋण मामले में मंगलवार को बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक यानी KCCB की ऊना शाखा ने ऋण अदायगी न होने पर बल्ह उपमंडल के नलसर क्षेत्र में स्थित पूर्व कांग्रेस नेता और कारोबारी युद्धचंद बैंस के निर्माणाधीन होटल परिसर को अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया।
दरअसल, बैंक की इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में पहले से ही चर्चा थी। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों, बैंक प्रबंधन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मौके पर विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
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बताया जा रहा है कि संबंधित कारोबारी ने बैंक से करोड़ों रुपये का ऋण लिया था, लेकिन लंबे समय से उसकी अदायगी नहीं हो सकी। बैंक द्वारा कई बार नोटिस जारी कर बकाया राशि जमा करने को कहा गया, मगर भुगतान नहीं होने पर बैंक ने कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति को अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार बल्ह, राजस्व विभाग के अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों ने होटल परिसर का निरीक्षण किया। राजस्व टीम ने संपत्ति की पैमाइश की और भवन के भीतर मौजूद निर्माण सामग्री तथा अन्य सामान का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया।
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इसके बाद होटल परिसर के चारों ओर कंटीली तार लगाकर बाड़बंदी की गई और मुख्य प्रवेश द्वार पर बैंक की ओर से कब्जे संबंधी नोटिस चस्पा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में इस मामले ने तब और तूल पकड़ा था जब संबंधित कारोबारी ने बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और संपत्ति के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी।
हालांकि बैंक प्रबंधन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और कानूनी प्रावधानों के तहत की गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की त्वरित कार्रवाई टीम यानी QRT और स्थानीय पुलिस बल पूरे समय मौके पर तैनात रहा। प्रशासन की निगरानी में कई घंटों तक चली यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।
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बैंक अधिकारियों ने साफ कहा कि, ऋण न चुकाने वाले अन्य डिफॉल्टरों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई आगे जारी रह सकती है। उनका कहना है कि बैंक की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए बकायादारों के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है।