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June 8, 2026

सुक्खू सरकार का मास्टर प्लान : खुले बाजार बिजली बेच भरेगी खाली खजाना, करोड़ों रुपये होगी आमदनी

प्रदेश की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिलेगी

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Energy Revenue

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी आय बढ़ाने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अब जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली अपनी हिस्सेदारी की बिजली को सीधे खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इस नई व्यवस्था से सरकार को प्रति यूनिट बिजली पर अतिरिक्त लाभ मिल रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदेश के खजाने को करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने की संभावना जताई जा रही है।

पहली बिक्री में मिला बड़ा फायदा

दरअसल, हिमाचल सरकार को एसजेवीएन की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी के बदले हर साल बड़ी मात्रा में बिजली प्राप्त होती है। अब तक यह बिजली लगभग उसी दर पर हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को उपलब्ध कराई जाती थी, जिससे सरकार को कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं मिलता था।

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लेकिन नई नीति के तहत सरकार ने इस बिजली को प्रतिस्पर्धी दरों पर खुले बाजार में बेचने का फैसला लिया है। सरकार को पहली ही बिक्री में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। सूत्रों द्वारा बताया गया कि, जो बिजली सरकार को करीब 3.88 रुपये प्रति यूनिट की लागत पर प्राप्त हुई, उसे खुले बाजार में 6.19 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा गया। इस प्रकार प्रति यूनिट लगभग 2.31 रुपये का अतिरिक्त लाभ अर्जित हुआ है।

इन परियोजनाओं से मिलती है बिजली

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में बिजली की मांग और बाजार दरें इसी प्रकार बनी रहती हैं तो राज्य को इससे भारी आर्थिक लाभ हो सकता है। प्रदेश सरकार को 1500 मेगावाट क्षमता वाली नाथपा-झाकड़ी जलविद्युत परियोजना और 412 मेगावाट क्षमता वाली रामपुर जलविद्युत परियोजना से अपनी हिस्सेदारी के रूप में हर वर्ष लगभग 180 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होती है।

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यह बिजली अब खुले बाजार में बेहतर कीमतों पर बेचकर राजस्व बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त आय का उपयोग बिजली क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, नई परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने और ऊर्जा ढांचे के विस्तार में किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।

बिजली बोर्ड के सामने नई चुनौती

हालांकि, सरकार की इस नई नीति का असर हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड पर भी पड़ने वाला है। पहले बोर्ड को सरकार से अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिजली उपलब्ध हो जाती थी, जिसे वह बैंकिंग व्यवस्था के तहत अन्य राज्यों के साथ विनिमय में इस्तेमाल करता था। गर्मियों में अतिरिक्त बिजली पड़ोसी राज्यों को देकर सर्दियों में आवश्यकता पड़ने पर वही बिजली वापस ली जाती थी।

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अब सरकार की हिस्सेदारी वाली बिजली सीधे बाजार में बिकने लगी है, इसलिए बिजली बोर्ड ने आगामी सर्दियों की जरूरतों को देखते हुए अभी से बिजली खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए टेंडर भी आमंत्रित किए जा रहे हैं ताकि सर्दियों के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो।

आर्थिक दृष्टि से अहम फैसला

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यदि बिजली बाजार में बेहतर दरें मिलती रहीं तो सरकार को अपनी हिस्सेदारी की बिजली से हर साल करोड़ों रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी, जिससे विकास परियोजनाओं को भी गति मिल सकेगी।

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