मंडी। हिमाचल प्रदेश में पंचायती चुनाव जरूर खत्म हो गए हैं, मगर पार्टियों के अंदर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने की दौड़ जारी है। कांग्रेस और BJP दोनों ही जोर लगा रहे हैं, ताकि गांव की राजनीति में उनका दबदबा बना रहे। इसी कड़ी में मंडी जिला परिषद की 36 सीटों के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
BJP का अध्यक्ष पद पर कब्जा तय
भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि उसके समर्थित उम्मीदवारों ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की है। यदि यह दावा अंतिम रूप से सही साबित होता है तो जिला परिषद मंडी में अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा लगभग तय माना जा रहा है।
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आखिर कुर्सी पर कौन बैठेगा
36 सदस्यीय जिला परिषद में 25 सीटों का आंकड़ा भाजपा को स्पष्ट बहुमत की स्थिति में पहुंचाता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर आखिर कौन बैठेगा।
नए चेहरों के साथ पुराने दिग्गज भी जीते
इस बार के जिला परिषद चुनाव में जहां कई नए चेहरे जीतकर सामने आए हैं, वहीं कई अनुभवी नेताओं ने भी अपना जनाधार बरकरार रखा है। नतीजों के बाद अब विजयी सदस्य राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुट गए हैं। अध्यक्ष पद को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से जीते उम्मीदवारों के नाम चर्चा में आने लगे हैं।
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बड़े राजनीतिक परिवारों को लगा झटका
चुनाव परिणामों में कुछ बड़े राजनीतिक परिवारों को भी निराशा हाथ लगी है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी और कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर को कोटली वार्ड से हार का सामना करना पड़ा।
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की बेटी भी चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकीं। इन हारों के बाद दोनों प्रभावशाली राजनीतिक परिवार अध्यक्ष पद की संभावित दौड़ से बाहर हो गए हैं।
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इन क्षेत्रों से मजबूत दावेदारों की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में सराज, बल्ह, सदर, सुंदरनगर और धर्मपुर क्षेत्रों से जीतकर आए कुछ सदस्यों के नाम अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। हालांकि अभी तक भाजपा या किसी अन्य दल ने आधिकारिक तौर पर किसी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है।
अगले कुछ दिनों में साफ होगी तस्वीर
सूत्रों के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों के भीतर जिला परिषद मंडी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाया जा सकता है। इसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि जिले की सबसे बड़ी पंचायती संस्था की कमान किसके हाथ में जाएगी।
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भाजपा इस जीत को केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर बता रही है। जबकि कांग्रेस और अन्य निर्वाचित सदस्य भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।
