सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गहराता जा रहा है, लेकिन सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की कांटी–मशवा पंचायत से आई एक खबर राजनीति के पार जाकर समाज सेवा की दुर्लभ मिसाल प्रस्तुत करती है।
पंचायत प्रधान ने पेश की मिसाल
यहां के निर्विरोध चुने गए पंचायत प्रधान काहन सिंह कंवर ने अपने लगभग पौने पांच साल के कार्यकाल में मिले ₹3.5 लाख से अधिक के पूरे मानदेय को समाज कल्याण के लिए दान कर दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने ₹10 लाख मूल्य की अपनी निजी जमीन भी पंचायत के सामुदायिक भवन के लिए दान कर दी है।
यह भी पढ़ें : सांसद कंगना ने बदला 'इतिहास', वंदे भारत को लेकर कही ऐसी बातें- जिसे सुन हर कोई हैरान
विश्वास का लौटाया सम्मान
करीब साढ़े चार वर्ष पहले ग्रामीणों ने आपसी सहमति से काहन सिंह कंवर को पंचायत का प्रधान चुना था। मतदाता सूची के मसले के चलते उनकी ताजपोशी में थोड़ी देरी हुई, लेकिन जनता के भरोसे में कमी नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि काहन सिंह ने इस भरोसे को काम की ईंटों से मजबूत किया है। पंचायत में विकास के कार्य पारदर्शी रहे और जनसहभागिता को प्राथमिकता दी गई।
पैसा और जमीन की दान
ग्यास पर्व के अवसर पर आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधान कंवर ने सार्वजनिक रूप से अपने पूरे मानदेय को समाज के नाम समर्पित करने की घोषणा की। मौके पर उन्होंने ₹51,000 का योगदान तुरंत सौंप दिया।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : विदेश से सही-सलामत लौटे बेटे, परिजनों ने ली राहत की सांस- जानें क्या हुआ उनके साथ?
गांव के लिए किया दान
मानदेय की राशि को पंचायत में इस प्रकार उपयोग किया जाएगा-
- पंचायत के 6 प्राइमरी स्कूलों और 6 आंगनबाड़ी केंद्रों को ₹21,000-₹21,000 वितरित किए जाएंगे।
- शेष राशि भगवान परशुराम मंदिर और मां ठाहरी मंदिर के निर्माण एवं रखरखाव में लगाई जाएगी।
यह भी पढ़ें :सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन : पानी के टैंकों में उग रहे पेड़, बूंद-बूद को तरस रहा गांव
सिर्फ शब्दों की नहीं, वास्तविक त्याग की कहानी
प्रधान कंवर ने समाजिक भवन निर्माण के लिए 5 बिस्वा से अधिक जमीन (करीब दस लाख रुपये मूल्य) भी दान में दी है। यह वह योगदान है, जिसे कई क्षेत्रों में सरकारी फाइलों के इंतजार में सालों लग जाते हैं, लेकिन यहां एक व्यक्ति ने रास्ता स्वयं खोल दिया।
“जनसेवा मेरा संकल्प, सुविधा नहीं”
काहन सिंह कंवर ने कहा कि प्रारंभ में मेरा चुनाव लड़ने का कोई विचार नहीं था। ग्रामीणों ने कहा कि आप हमारे लिए काम कर सकते हैं, इसलिए मैंने जिम्मेदारी स्वीकार की। उसी दिन मैंने मन में तय कर लिया था कि मेरा मानदेय समाज के कार्य में लगेगा। नेता पद से नहीं, भावना से बनता है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई- 294 प्राइवेट स्कूल होंगे बंद! जानें पूरा मामला
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य पंचायत में लूटतंत्र या पक्षपात की संस्कृति को जड़ से समाप्त करना है। वे अपने इस संकल्प का श्रेय अपने परिवार को देते हैं।उनकी पत्नी एक गृहिणी होने के साथ सतौन महिला मंडल की प्रधान हैं। दो बेटे और दो बेटियों वाला यह परिवार वर्षों से समाज सेवा में सक्रिय है।
चुनावी दौर में एक मजबूत संदेश
ऐसे समय में जब राजनीति अक्सर लाभ, रसूख और अवसर की धुरी पर घूमती दिखाई देती है, काहन सिंह कंवर का यह कदम न केवल उनके क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यह उदाहरण उन प्रतिनिधियों के लिए एक दर्पण है, जो पद को अवसर समझते हैं, न कि जिम्मेदारी।
