शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य की चरमराती सरकारी शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पटरी पर लाने और पूरे प्रदेश में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने के लिए कई क्रांतिकारी और कड़े फैसलों को मंजूरी दे दी है। इस नए रिफॉर्म (सुधार) के तहत अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गैर-बोर्ड कक्षाओं (Non-Board Classes) की वार्षिक परीक्षाएं मार्च की बजाय दिसंबर महीने में ही आयोजित की जाएंगी। यही नहीं, परीक्षाओं के तुरंत बाद जनवरी महीने से स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र (New Session) भी शुरू हो जाएगा।
सुक्खू सरकार ने लिए कई बड़े फैसले
राज्य सचिवालय में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इन ऐतिहासिक बदलावों पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस फैसले से अब ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन दोनों तरह के स्कूलों में पढ़ाई का ढर्रा पूरी तरह बदल जाएगा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: बीच सड़क वर्दीधारी पुलिसकर्मी से की मा.र.पीट, फरमान खान ने बरसाए थप्पड़-मुक्के; देखें VIDEO
पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, हिमाचल के शीतकालीन स्कूलों में तो परीक्षाएं दिसंबर में होती आ रही हैं, लेकिन ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में ये परीक्षाएं मार्च में कराई जाती थीं और नया सत्र अप्रैल से शुरू होता था। इस दोहरी व्यवस्था के कारण बच्चों की पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों में काफी तालमेल नहीं बैठ पाता था। अब सुक्खू सरकार की नई नीति के तहत पूरे हिमाचल प्रदेश में एक ही समय यानी दिसंबर में परीक्षाएं संपन्न होंगी, जिससे जनवरी से पूरे राज्य के बच्चे एक साथ नए सत्र की कक्षाओं में बैठ सकेंगे।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : पति-सास और ननद करते थे परेशान, सह नहीं पाई शालू- बंद कमरे में खत्म कर ली जिंदगी
खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज
इस समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सरकारी स्कूलों के गिरते स्तर और परीक्षा परिणामों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकारी स्कूलों में खराब वार्षिक परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों पर अब गाज गिरना तय है। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजों का विस्तृत विश्लेषण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे हैं और जिनके विषय में बच्चे फेल हो रहे हैं, उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।
बायोमीट्रिक हाजिरी नहीं तो नो सैलरी
शिक्षकों की लेटलतीफी और स्कूलों से गायब रहने की आदतों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने डिजिटल हंटर चलाने की तैयारी कर ली है। शिक्षा मंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। यदि कोई शिक्षक या स्टाफ सदस्य इसकी अनुपालना नहीं करता है या बायोमीट्रिक मशीन पर हाजिरी नहीं लगाता है, तो 'नो वर्क, नो पे' के सिद्धांत के तहत उसकी वेतन कटौती जैसे सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह भी पढ़ें : जयराम सरकार ने 'रसूखदारों' को बांट दिए गरीबों के 171 करोड़, बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा; CM सुक्खू ने बैठाई जांच
कॉलेज के छात्रों को बड़ी सौगात
उच्च शिक्षा के स्तर पर सुक्खू सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। अब राज्य में स्नातक की डिग्री पूरी कर चुके या कर रहे विद्यार्थियों के लिए 'अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री' (Apprenticeship Embedded Degree) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार की लॉटरी के नियम तैयार, 3 माह में पहला ड्रा; 5 करोड़ के इनाम को कितने में मिलेगा टिकट
इस बेहतरीन पहल के तहत कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न नामी उद्योगों (Industries) में सीधे काम करने और प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस ऑन-जॉब ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को हर महीने सरकार और उद्योग की तरफ से स्टाइपेंड (आर्थिक भत्ता) भी प्रदान किया जाएगा।
हिमाचल के युवा सीखेंगे विदेशी भाषाएं
रोजगार के अंतरराष्ट्रीय अवसरों को भांपते हुए शिक्षा विभाग अब कॉलेज स्तर पर विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) के विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि इस कदम से हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की भाषा दक्षता प्राप्त होगी, जिससे वे विदेशों में भी आसानी से रोजगार हासिल कर सकेंगे।
