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July 19, 2026
पंजाब को बिजली बेचकर अपना राजस्व बढ़ाएगा हिमाचल, आपसी मतभेदों पर CM सुक्खू ने दिया बड़ा बयान
सीएम सुक्खू का बड़ा एलान, बड़े भाई से मतभेद स्वाभाविक, बातचीत से सुलझेंगे विवाद
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शिमला/चंडीगढ़। पड़ोसी राज्यों के आपसी रिश्तों और विकास की राजनीति में एक बेहद सकारात्मक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। अपनी बिजली किल्लत से जूझ रहा पंजाब अब हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदेगा। इस बड़े फैसले से न केवल पंजाब को ऊर्जा संकट से राहत मिलेगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। चंडीगढ़ में आयोजित 'टाई चंडीगढ़ लीडरशिप कॉन्क्लेव' में शिरकत करते हुए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस रणनीतिक साझेदारी का औपचारिक एलान किया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कॉन्क्लेव के मंच से दोनों राज्यों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पंजाब अगले तीन वर्षों तक हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदेगा और इसके लिए दोनों सरकारों के बीच बहुत जल्द ही पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। हालांकि, इस समझौते के तहत दी जाने वाली बिजली की कुल मात्रा या उसकी दरों को लेकर अभी कोई आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसे दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था और सहूलियत के लिहाज से एक 'विन-विन सिचुएशन' (दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद) माना जा रहा है।
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दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चल रहे विभिन्न सीमा व जल विवादों और राजनीतिक मतभेदों पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने एक बड़ा और परिपक्व बयान देकर सबका दिल जीत लिया। उन्होंने बड़े ही आत्मीय अंदाज में कहा कि पंजाब हिमाचल प्रदेश का बड़ा भाई है। यह बेहद स्वाभाविक है कि एक ही परिवार में बड़े भाई के साथ समय-समय पर कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद हो जाएं। लेकिन इन मतभेदों का मतलब मनभेद नहीं है। दोनों राज्यों के बीच जितने भी लंबित मामले हैं, उनका समाधान हम किसी टकराव से नहीं, बल्कि आपसी संवाद, टेबल टॉक और भाईचारे के माध्यम से सकारात्मक माहौल में सुलझा लेंगे।
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मुख्यमंत्री के बयान को केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दोनों राज्यों के संबंधों में नई सकारात्मक शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। लंबे समय से विभिन्न मुद्दों पर दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है और अब संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की बात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ऊर्जा सहयोग के साथ अन्य लंबित विषयों पर भी सहमति बनती है तो यह दोनों राज्यों के लिए लाभकारी साबित होगा।
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हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख जलविद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल है। प्रदेश की नदियां और पर्वतीय भूगोल ऊर्जा उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं। राज्य में बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हैं, जिनसे हजारों मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इसी क्षमता के दम पर हिमाचल न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करता है बल्कि अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। राज्य सरकार अब ऊर्जा क्षेत्र को राजस्व बढ़ाने के एक बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
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गर्मियों और कृषि सीजन के दौरान पंजाब में बिजली की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता राज्य के लिए राहत साबित हो सकती है। वहीं हिमाचल के लिए यह समझौता आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद रहेगा। कुल मिलाकर, प्रस्तावित पावर परचेज एग्रीमेंट को दोनों राज्यों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर पंजाब को ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, तो दूसरी ओर हिमाचल की जलविद्युत क्षमता सीधे तौर पर प्रदेश की आय बढ़ाने का माध्यम बनेगी। आने वाले दिनों में इस समझौते को लेकर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।