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June 4, 2026

जयराम सरकार ने 'रसूखदारों' को बांट दिए गरीबों के 171 करोड़, बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा; CM सुक्खू ने बैठाई जांच

ऑडिट में हुआ बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा, अब तक 1495 फर्जी लाभार्थी पकड़े

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Himachal Welfare Scam

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्व की भाजपा (जयराम) सरकार के कार्यकाल के दौरान गरीबों और मजदूरों के हक के पैसे पर रसूखदार अमीरों द्वारा डाका डालने का एक बेहद शर्मनाक और बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड द्वारा कराए गए एक विशेष सरकारी ऑडिट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछली सरकार में कल्याणकारी योजनाओं का करोड़ों रुपया गलत और अपात्र लोगों की जेबों में डाल दिया गया।

सुक्खू सरकार घर घर जाकर करेगी जांच

इस महा-फर्जीवाड़े की परतें खुलते ही सूबे की वर्तमान सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सुक्खू सरकार के निर्देश पर अब बोर्ड के अधिकारियों की टीमें इस घोटाले की कड़ियां जोड़ने और भ्रष्ट लोगों को बेनकाब करने के लिए सीधे उनके घर-घर जाकर इस फर्जीवाड़े की जमीनी जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) करेंगी।

ऑडिट में खुलासा, अपात्रों को बांटे 171 करोड़

विभागीय ऑडिट की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2022 के बीच यानी महज डेढ़ साल के छोटे से कार्यकाल में रहस्यमयी तरीके से 70 हजार नए कामगारों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कर दिया गया और आनन-फानन में 171.61 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि वितरित कर दी गई।

 

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सरकारी कर्मियों उनकी पत्नियों को कागजों में बनाया मजदूर

हद तो तब हो गई जब दस्तावेजों की स्क्रूटनी में यह बात सामने आई कि बड़े-बड़े व्यवसायियों, सरकारी कर्मचारियों, स्कूल अध्यापकों और यहां तक कि सेना में बड़े पदों पर तैनात अधिकारियों की पत्नियों तक को कागजों पर 'दिहाड़ीदार मजदूर' दिखा दिया गया। इन अमीर और रसूखदार लोगों ने गरीबों के लिए बनी मेटरनिटी (प्रसूति) और मकान निर्माण जैसी योजनाओं का अवैध रूप से मोटा लाभ उठा लिया।

1495 फर्जी लाभार्थी रडार पर

इस पूरे घोटाले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के स्पष्ट निर्देश हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल और केवल पात्र व वास्तविक गरीब व्यक्तियों तक ही पहुंचना चाहिए। सरकार के कड़े रुख के बाद अब तक 1495 अपात्र और फर्जी लाभार्थी रंगे हाथों पकड़े जा चुके हैं।

 

प्रशासन की इस मुस्तैदी और एफआईआर के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 5 रसूखदार अपात्र लोगों ने डर के मारे करीब 7 लाख रुपये की राशि खुद ही सरकार को सरेंडर (वापस) कर दी है। विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन फर्जी लाभार्थियों ने गलत तरीके से पैसा लिया है, उनसे यह राशि ब्याज समेत वसूल की जाएगी।

 

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अब तक 38 पर मुकदमा, 953 पर एफआईआर की तैयारी

इस घोटाले के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो चुका है। मामले में अब तक 38 जालसाजों के खिलाफ नामजद मुकदमा दायर किया जा चुका है, जिनमें से 12 लोगों द्वारा 9 लाख रुपये का सीधा अवैध लाभ लेने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, पकड़े गए फर्जी लाभार्थियों में से 953 और लोगों पर बहुत जल्द एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

सराज और हमीरपुर बेल्ट से शुरू हुई थी धांधली

जांच के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य केंद्र (एपिसेंटर) बड़सर, भोरंज, हमीरपुर और सुजानपुर के इलाके रहे, जहां सबसे पहले इन धांधलियों को पकड़ा गया। महज चार महीने के भीतर सबसे ज्यादा पंजीकरण मंडी जिला में 15,094, हमीरपुर में 13,450 और कांगड़ा में 9,955 किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अपने विधानसभा क्षेत्र सराज में अकेले ही 18 हजार पंजीकरण चमका दिए गए, जो अब गहन जांच के दायरे में हैं।

 

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फील्ड में उतरेंगे अधिकारी

हिमाचल प्रदेश कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर ने इस संबंध में बताया कि अपात्र लोगों को वित्तीय सहायता देने से जुड़े तमाम दस्तावेजों की शुरुआती जांच पूरी हो चुकी है। अब हमारे श्रम अधिकारी सप्ताह में तीन दिन कार्यालय में बैठकर 'हिम परिवार पोर्टल' के माध्यम से ई-केवाईसी (e-KYC) करेंगे और बाकी के तीन दिन फील्ड में घर-घर जाकर संदिग्धों से सीधे पूछताछ करेंगे। 6 महीने के भीतर यह पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया मुकम्मल कर ली जाएगी और एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा।"

 

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वास्तव में कौन है पात्र?

नियमों के मुताबिक, कामगार कल्याण बोर्ड की योजनाओं का लाभ केवल वही पुरुष या महिला ले सकती है, जिसने साल में कम से कम 90 दिन मनरेगा, सड़क, पुल, बांध या किसी निजी व सरकारी निर्माण कार्य में वास्तविक रूप से दिहाड़ी-मजदूरी की हो। कोई भी ठेकेदार, दुकानदार, रसूखदार या सरकारी नौकरी पेशा व्यक्ति इस श्रेणी में कतई पात्र नहीं है।

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