शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का संजौली मस्जिद विवाद लगातार बढ़ रहा है। एमसी कोर्ट ने संजौली मस्जिद को अवैध घोषित किया था और उसे पूरी ही धवस्त करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद मस्जिद में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने जा रहे हैं। इस सब पर देवभूमि संघर्ष समिति एक बार फिर मुखर हो गई है।
11 दिसंबर से बड़ा होगा आंदोलन
देवभूमि संघर्ष समिति ने हिमाचल की सुक्खू सरकार को चेतावनी दी है कि अगर विवादित स्थल पर मुसलमानों को जाने से नहीं रोका गया, तो देवभूमि संघर्ष समिति एक बार फिर बड़ा आंदोलन करेगी। यह आंदोलन 11 सितंबर 2024 से भी बड़ा होगा। अगर विवादित ढांचे में जाने से मुसलमानों का नहीं रोका गया, तो हिंदू भी विवादित स्थल पर जाएगा। देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक भरत भूषण ने कहा कि अब वे न तो वक़्त बताएंगे और न ही दिन, अब समिति के सदस्य सीधा ही ऑपरेशन करने की तैयारी में हैं।
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सरकार मुस्लिम समुदाय को दे रही संरक्षण
देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन मुस्लिम समुदाय के लोगों को जानबूझकर संरक्षण देने की कोशिश कर रहा है। देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक ने कहा कि जब विवादित स्थान पर जाने से मुसलमानों को नहीं रोका जा रहा है, तो वहां हिंदू भी प्रवेश करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रशासन को प्रशासन की तरह ही काम करना चाहिए। संजौली में मुस्लिमों को भी विवादित स्थल पर जाने से रोका जाना चाहिए, तो हिन्दू भी अपनी मर्यादा में रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाईचारे से उनका भरोसा पूरी तरह से उठ गया है।
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हिमाचल की राजधानी शिमला की विवादित संजौली मस्जिद का मामला एक बार फिर गरमा गया है। आज शुक्रवार को जुम्मे की नमाज़ अदा करने के लिए जब मुस्लिम समुदाय के 30 से अधिक लोग मस्जिद की ओर रवाना हुए, तो क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पुलिस के पहरे में जुम्मे की नमाज
संजौली मस्जिद को लेकर देवभूमि संघर्ष समिति पहले ही ऐलान कर चुकी थी कि वह वहां नमाज़ नहीं होने देगी। इसके चलते प्रशासन ने ऐहतियातन बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। सुरक्षा इंतज़ामों के बीच पुलिस ने नमाज़ियों को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति दी, हालांकि उन्हें पहले पहचान सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
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देवभूमि संघर्ष समिति ने किया हनुमान चालीसा का पाठ
इसी दौरान मस्जिद के पास देवभूमि संघर्ष समिति के कार्यकर्ता भी एकत्र हो गए। उन्होंने नमाज़ के विरोध में सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। समिति ने इसे धार्मिक भेदभाव करार देते हुए सरकार और प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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संघर्ष समिति के आरोप
संघर्ष समिति के संयोजक मनोज ठाकुर और विजय शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने समिति के सदस्यों को मस्जिद के पास जाकर धार्मिक अनुष्ठान करने से रोका, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोगों को पूरी सुरक्षा के साथ मस्जिद में नमाज़ पढ़ने दी गई। उन्होंने कहा कि यह दोहरी नीति नहीं तो और क्या है, हिंदुओं को उनके धार्मिक अनुष्ठान से रोका जा रहा है और सरकार खुलकर एक पक्ष को समर्थन दे रही है।
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मनोज ठाकुर ने कहा कि हमने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि मस्जिद में नमाज़ अदा की जाती है, तो हम इसका सड़कों पर विरोध करेंगे। अब यदि प्रशासन बल प्रयोग करता है, तो हमारे कार्यकर्ता भी खाली हाथ नहीं रहेंगे। संघर्ष समिति ने शुक्रवार शाम चार बजे एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। समिति ने चेताया है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
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क्या बोले पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक संजय यादव ने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि हमने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। किसी भी समुदाय को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित नहीं किया गया है, लेकिन कानून और व्यवस्था से खिलवाड़ की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
स्थानीय निवासियों की चिंता
स्थानीय लोगों में बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता है। एक दुकानदार राजीव ठाकुर ने कहा कि हम सालों से यहां भाईचारे के साथ रहते आए हैं। लेकिन अब जिस तरह से धार्मिक मुद्दों को उछाला जा रहा है, वह माहौल को बिगाड़ रहा है।
